Panna News: पन्ना में शराबबंदी का दिखावा, शहर की दुकानें बंद लेकिन सीमा के बाहर नई दुकानें स्वीकृत

पन्ना में शराबबंदी का दिखावा, शहर की दुकानें बंद लेकिन सीमा के बाहर नई दुकानें स्वीकृत
  • पन्ना में शराबबंदी का दिखावा
  • शहर की दुकानें बंद लेकिन सीमा के बाहर नई दुकानें स्वीकृत
  • आबकारी विभाग पर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप

Panna News: ०1 अप्रैल 2025 से मध्य प्रदेश सरकार ने पन्ना शहर में शराबबंदी लागू करने की घोषणा की थी जिसे लेकर स्थानीय लोगों में उम्मीद की किरण जागी थी। शराब से जुड़े अपराधों और सामाजिक अव्यवस्थाओं में कमी की अपेक्षा के साथ शहरवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया था। हालांकि अब यह घोषणा महज एक दिखावा साबित होती नजर आ रही है। आबकारी विभाग ने शहर की चार शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय तो लिया लेकिन इनके स्थान पर शहर की सीमा से सटे चार नए स्थानों पर दुकानें खोलने की स्वीकृति दे दी है। इस कदम से शराबबंदी की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं और आबकारी विभाग पर शराब ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप लग रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पन्ना शहर को पूरी तरह शराब मुक्त बनाया जाएगा और यहां कोई भी शराब दुकान संचालित नहीं होगी। नई शराब नीति 2025 में यह भी प्रावधान था कि बंद की गई दुकानों को कहीं और स्थानांतरित नहीं किया जाएगा लेकिन आबकारी विभाग ने इस नीति की आड़ में एक नया रास्ता निकाल लिया है। पन्ना जिले में कुल 43 शराब दुकानें थीं जिनमें से शहर की चार दुकानों को बंद कर शेष 39 दुकानों का ठेका आशीष शिवहरे को 177 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया। शहर में दुकानें बंद होने के बाद लोगों को शराब के लिए 25-30 किलोमीटर दूर देवेंद्रनगर, मड़ला या अजयगढ़ जाना पड़ता जो व्यावहारिक रूप से सभी के लिए संभव नहीं था। हालांकि आबकारी विभाग ने इस समस्या का एक ऐसा समाधान निकाला जिसने शराबबंदी के उद्देश्य को ही कमजोर कर दिया।

शहर की चार दुकानों को बंद करने के बाद अब शहर की सीमा से सटे ग्राम मनौर, दहलान चौकी पटी, अमझिरिया अकोला और सकरिया के समीप चार नई दुकानें खोलने की योजना बनाई गई है। इसका मतलब है कि शहर के भीतर भले ही शराब की बिक्री बंद हो लेकिन 1 से 10 किलोमीटर की दूरी पर शराब आसानी से उपलब्ध रहेगी। इस कदम से न केवल सडक़ हादसों की आशंका बढ़ेगी बल्कि कालाबाजारी और अवैध बिक्री को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। आबकारी विभाग का दावा है कि ये नई दुकानें नहीं हैं बल्कि अजयगढ़, गुनौर, देवेंद्रनगर और मड़ला से स्थानांतरित की जा रही हैं लेकिन नई शराब नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि बंद दुकानों को स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम शराब ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है शहरवासियों का मानना है कि इस कदम से शराबबंदी का कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि शराब की उपलब्धता बनी रहेगी और लोग आसानी से इसे हासिल कर सकेंगे। स्थानीय लोगों में इस फैसले को लेकर नाराजगी और निराशा है। उनका कहना है कि शराबबंदी से अपराध और सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगने की उम्मीद थी लेकिन शहर की सीमा के नजदीक दुकानें खोलने से यह उद्देश्य विफल हो रहा है। सरकार के इस कदम से जनता के बीच असंतोष बढऩे की आशंका है।

इनका कहना है

पन्ना शहर की दुकानें स्थानांतरित नहीं की गईं हैं अन्य दुकानों को स्थानांरित किया गया है। यह सब कुछ शासन के नियमों के अनुसार हो रहा है। मध्य प्रदेश शासन ने जो नीति बनाई है उसी का पालन किया जा रहा है।

मुकेश मौर्य, जिला आबकारी अधिकारी पन्ना

Created On :   26 March 2025 5:26 PM IST

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