Chhindwara News: ढाई माह में ४८ लोगों ने किया सुसाइड, पारिवारिक कलह, गुस्सा, शराब के नशे में जहर पीकर और फांसी लगाकर दी जान

ढाई माह में ४८ लोगों ने किया सुसाइड, पारिवारिक कलह, गुस्सा, शराब के नशे में जहर पीकर और फांसी लगाकर दी जान
  • ढाई माह में ४८ लोगों ने किया सुसाइड
  • पारिवारिक कलह, गुस्सा, शराब के नशे में जहर पीकर और फांसी लगाकर दी जान
  • हर दिन १० से १२ लोग जहर पीकर पहुंचते हैं जिला अस्पताल

Chhindwara News: पारिवारिक कलह, अपनों से नाराजगी, शराब के नशे, बीमारी व तंगी के अलावा प्रेम संबंधों में धोखे से आहत लोग आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा रहे हैं। इस साल जनवरी से अब तक ४८ लोग आत्महत्या कर चुके हैं। यह आंकड़ा सिर्फ जिला अस्पताल का है। जिले के अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़े इसमें शामिल नहीं है। अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों के आंकड़ों को जोड़ा जाए तो यह आत्महत्या करने वालों की संख्या दोगुनी भी हो सकती है यदि इन आंकड़ों की भी संख्या दोगुनी होगी। इसी तरह रोजाना आत्महत्या का प्रयास करने वाले १० से १२ पेशेंट जिला अस्पताल पहुंचते है। इनमें जिले के अलग-अलग अस्पतालों से रेफर पेशेंट शामिल है।

मामूली तनाव भी नहीं झेल पा रहे युवा-

आत्महत्या करने वालों में अधिकांश युवा है। अक्सर पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आता है कि माता-पिता की डांट से नाराज, शराब के नशे या गुस्से में युवा आत्महत्या जैसे कदम उठाते है। इलाज के बाद जो स्वस्थ हो गया वह धोखे से जहर पीने की कहानी पुलिस को सुनाता है लेकिन हकीकत कुछ ओर ही होती है।

बदनामी का डर भी एक वजह-

बदनामी का डर दिखाकर ब्लैकमेल करने का एक मामला सामने आ चुका है। एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को साइबर अपराधियों ने बदनाम करने की धमकी दी थी, इससे परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली। इसी तरह अमरवाड़ा में एक शिक्षक ने बदनामी के डर से जहर पीकर जान दे दी थी। हालांकि दोनों प्रकरणों के आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह... मन में रखने की बजाए अपनों से बात करें-

- आत्महत्या का विचार उन लोगों के मन में आता है जो अपने आप को अकेला महसूस करते है। ऐसे लोग अपने मन की बात परिवार के किसी सदस्य या दोस्त से शेयर जरुर करें। इससे मन शांत और तनाव खत्म होगा।

- माता-पिता परिवार का माहौल दोस्ताना रखें। बच्चों को समझे यदि उसे पढ़ाई संबंधी समस्या है या कोई गलती हो गई है तो बच्चे को शांति मन से सुने और समाधान निकाले।

- आठ से दस घंटे मोबाइल का इस्तेमाल भी तनाव की वजह बन रहा है। मोबाइल का इस्तेमाल कम कर परिवार के सदस्यों को समय दें।

- शराब या किसी अन्य तरह के नशे से दूर रहे। परिवार का सदस्य नशे का आदी हो चुका है तो विवाद करने की बजाए, उसका इलाज कराएं।

- हर शख्स कम से कम आधा घंटे सैर, योगा और प्राणायाम करें। इससे हैप्पी हार्मोंस तेजी से बनते है।

- नींद भरपूर लें, सोने से एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दें। इससे मानसिक तनाव काफी हद तक दूर होता है।

- नींद न आने, मानसिक तनाव बने रहने या आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार बार-बार आने जैसी समस्या होने पर चिकित्सकीय इलाज कराएं।

- डॉ तुषार तल्हान, मनोचिकित्सक, मेडिकल कॉलेज

- जिला अस्पताल में मौत के आंकड़े...

माह जहर फांसी

जनवरी १३ ०५

फरवरी ०७ ०८

२० मार्च तक १२ ०३

Created On :   21 March 2025 6:18 PM IST

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