शी जिनपिंग का नया फरमान: ताइवान का समर्थन करने वालों की बढ़ीं मुश्किलें, चीन ने लॉन्च किया चैनल, कहा- 'बस नाम बताओ, फिर हम देख लेंगे'

- चीन ने ताइवान के समर्थकों के लिए अपनाया सख्त रुख
- जिनपिंग ने किया शिकायत करने का चैनल लॉन्च
- इस चैनल में ताइवान के समर्थकों के खिलाफ दी जाएगी जानकारी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजिंग की तरफ से हाल ही में एक फरमान जारी किया था, जो कि ताइवान का समर्थन करने वालों और स्वतंत्रता का पक्ष लेने वालों में डर का माहौल देखने को मिल रहा है। क्योंकि चीन की सरकार ने एक नया 'सूचना देने का चैनल' लॉन्च किया है। जनता से कहा गया है कि अगर उनको किसी भी तरह के ऐसे लोग मिलें या किसी भी तरह का ऐसा समूह मिले जो ताइवान की स्वतंत्रता और उसके समर्थन में बात कर रहा है तो तुरंत इस जानकारी दें।
चीन ने लगाया आरोप
चीन की तरफ से आरोप लगाया गया है कि ताइवान की शासक डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी लोगों को दबा रही है और उन पर अत्याचार कर रही है। 26 मार्च को चीन के स्टेट काउंसिल के ताइवान अफेयर्स ऑफिस ने इस चैनल का ऐलान किया है। साथ ही फरमान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ताइवान के कुछ नेता के साथ सरकारी अधिकारी और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स गुंडों की तरह काम कर रहे हैं और डीपीपी के अपराधों में उसका समर्थन कर रहे हैं।
रिपोर्ट करें चैनल से
चीन के प्रशासन ने कहा है कि, ताइवान का कोई भी इंसान अगर किसी भी तरह का उत्पीड़न सह रहा है और उसके पास इससे जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी है तो वो आराम से इस चैनल से रिपोर्ट कर सकता है। बीजिंग ने ये भी कहा है कि, जो भी इस पर रिपोर्ट करेगा उसकी पहचान पूरी तरह से गुप्त होगी और जिसके खिलाफ रिपोर्ट की गई है उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अभी ये पक्का नहीं हुआ है कि किस तरह से आरोपियों को सजा दी जाएगी।
ताइवान खतरे में
फरमान के जारी होने के बाद ही कई लोगों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि सिर्फ ताइवान में ही नहीं बल्कि चीन ने ये फरमान जारी करके अन्य देशों में भी स्वतंत्रता समर्थकों पर दबाव डालने की कोशिश करेगा। बीजिंग की तरफ से पहले भी ताइवान के फेमस बिजनेसमैन और नेताओं पर भी प्रतिबंध लगाया है। उनको चीन ने विभाजनकारी गतिविधियों के आरोप में भी निशाना साधा है।
चीन का क्या है कहना?
चीन ने कहा है कि, ताइवान उनका ही हिस्सा है और वे इसको किसी भी कीमत पर अपने से अलग नहीं रहने देना चाहते हैं, भले ही इसके लिए उनको बल का उपयोग करना पड़े। इसके बाद भी ताइवान खुद को एक इंडीपेंडेंट राष्ट्र मानता है और ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते ने भी चीन की नीतियों का विरोध किया है।
Created On :   27 March 2025 2:43 PM IST