Shahdol News: मार्च क्लोजिंग, वित्तीय वर्ष समाप्ति के अंतिम 3 दिन में सिर्फ एक ही बिल पास

मार्च क्लोजिंग, वित्तीय वर्ष समाप्ति के अंतिम 3 दिन में सिर्फ एक ही बिल पास
  • गैरजरूरी बिलों पर 29 मार्च से लगी रोक का असर
  • सीएम हाउस से फोन आया, पास करवाने के लिए भोपाल से मंजूरी ली गई।
  • वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अकेले मार्च माह में ही जिले के प्रमुख विभागों ने 194 करोड़ रूपए खर्च किए।

Shahdol News: वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अंतिम दिनों में बिल लगाकर बजट खत्म करने के मंसूबों पर वित्त विभाग ने पानी फेर दिया। 29 मार्च से गैर जरूरी बिलों के भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही जरूरी बिल पास करवाने के लिए भोपाल से मंजूरी की व्यवस्था लागू कर दी गई। इसका असर यह हुआ कि 29, 30 और 31 मार्च को कार्यालय तो खुले पर बिल नहीं लगे।

इन तीन दिनों में शहडोल में सिर्फ एक ही बिल लगा। इसके लिए भी सीएम हाउस से फोन आया, पास करवाने के लिए भोपाल से मंजूरी ली गई। इसमें मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से गढ़ी सोहागपुर निवासी शाफिया पति मो. अली को इलाज के लिए 50 हजार रूपए की राशि मंजूर की गई।

मार्च में प्रमुख विभागों द्वारा लगाए गए बिल

विभाग राशि करोड़ में

दक्षिण वन मंडल 9.63

जनजातीय कार्य 7.85

उत्तर वनमंडल 6.17

सीएमएचओ 4.27

एसपी ऑफिस 2.69

योजना सांख्यिकी 2.63

सिविल सर्जन 2.57

कलेक्टर कार्यालय 1.55

सहकारिता 1.54

मत्स्य विभाग 1.01

मार्च के 28 दिन में लगे 194 करोड़ रूपए के बिल

दक्षिण वन मंडल के बाद जनजातीय कार्यविभाग की सर्वाधिक राशि

वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अकेले मार्च माह में ही जिले के प्रमुख विभागों ने 194 करोड़ रूपए खर्च किए। इसमें दक्षिण वन मंडल (साउथ) शहडोल के 9 करोड़ 63 लाख रूपए के बिल के बाद दूसरा सर्वाधिक बिल लगाने वाला विभाग जनजातीय कार्य विभाग रहा। यहां से 7 करोड़ 85 लाख रूपए के बिल 28 मार्च तक लगाए गए।

खास-खास

कई विभाग प्रमुखों ने बिल में तकनीकी खामी मिलने पर रोक लगने के बाद पास करवाने के लिए उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई। ऐसी ही शिकायत नार्थ वन मंडल से हुई।

बिल पास करवाने के लिए सरकारी नियमों को ताक पर भी रखा गया। योजना एवं साख्यिकी विभाग से जारी होने वाली राशि में कई काम ऐसे हैं, जहां काम पूरा नहीं हुआ है और लिखित आश्वासन के सहारे ही पंचायतों को पैसे दे दिया गया।

साफ्टवेयर परिवर्तन का असर, अंतिम दिन 71 रजिस्ट्री

एक अप्रैल से रजिस्ट्री संपदा 2.0 से ही होगी। सोमवार को अंतिम दिन संपदा 1.0 से भी रजिस्ट्री हो रही थी। साफ्टेवयर की नई व्यवस्था का असर वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कुल रजिस्ट्री पर पड़ा। अंतिम दिन संपदा 1.0 में 51 और संपदा 2.0 में 20 रजिस्ट्री मिलाकर कुल 71 रजिस्ट्री हुई। इसका कारण यह रहा कि जिन वेंडर के संपदा 1.0 में पैसे जमा है वे साफ्टवेयर बंद होने के कारण ज्यादा पैसे नहीं रखे।

संपदा 2.0 में आधार का महत्व ज्यादा

रजिस्ट्री के लिए एक अप्रैल से लागू होने वाली संपदा 2.0 में आधार कार्ड का महत्व बढ़ गया है। जमीन के क्रेता, विक्रेता और गवाहों का अपडेट आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है, जिससे किसी अन्य के नाम कोई अन्य व्यक्ति खड़ा होकर रजिस्ट्री में गफलत नहीं कर पाएं।

Created On :   2 April 2025 12:38 PM IST

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