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Chhatrapati Sambhaji Nagar News: महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने पर स्टे, दूसरे मामले में सरपंच के अविश्वास प्रस्ताव पर अंतरिम स्थगन

- सिल्लोड़ का प्रकरण, जनहित याचिका लंबित होते तक रोक
- महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने पर हाईकोर्ट का स्टे
- दूसरे मामले में भवन की सरपंच के अविश्वास प्रस्ताव पर अंतरिम स्थगन
Chhatrapati Sambhaji Nagar News. सिल्लोड़ में 14 महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने को अपर जिलाधिकारी ने इजाजत दी थी। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति मंगेश पाटील व न्यायमूर्ति प्रफुल्ल खुलालकर की पीठ ने इसमें स्थगन दिया है। जनहित याचिका लंबित होने तक कोई प्रतिमा स्थापित न करने का आदेश खंडपीठ ने दिया। महेश शंकरपल्ली ने दायर की याचिका में बताया कि सिल्लोड़ नप की ओर से सर्वे 15 में महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव 13 सितंबर 2024 को पारित किया था। उसी दिन इजाजत के लिए जिलाधिकारी के पास प्रस्ताव भेजा गया। अपर जिलाधिकारी विनोद खिरोलकर ने 14 अक्टूबर 2024 को प्रतिमा स्थापित करने की सशर्त इजाजत दी। वहां डॉ. बाबासाहब आंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज, महाराणा प्रताप, महात्मा फुले, सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होलकर, अण्णाभाऊ साठे, छत्रपति शिवाजी महाराज, संत सेवालाल, संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि, शंकरराव चव्हाण और माणिकदादा पालोदकर की प्रतिमा स्थापित की जाने वाली थी।
भवन की सरपंच के अविश्वास प्रस्ताव पर अंतरिम स्थगन
दूसरे मामले में सिल्लोड़ तहसील की भवन ग्रामपंचायत की सरपंच लक्ष्मीबाई कलम के लिए पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में सभा की नोटिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति मंगेश पाटील व न्यायमूर्ति प्रफुल्ल खुबालकर की पीठ ने स्थगन दिया है। भवन ग्रामपंचायत के सरपंच पद पर लक्ष्मीबाई कलम का चयन 22 मई 2023 को हुआ था। उनके चयन के बाद 20 महीने में उनके खिलाफ ग्रामपंचायत सदस्य दीपाली मिसाल व अन्य सदस्यों ने 5 फरवरी 2025 को तहसीलदार को ज्ञापन देकर सरपंच कलम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए सभा आयोजित करने की विनती की। तहसीलदार ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए विशेष सभा लेने का आदेश दिया। नोटिस को सरपंच कलम ने एड. रवींद्र गोरे के जरिए खंडपीठ में चुनौती दी। प्रकरण में तत्काल सुनवाई द्विसदस्यीय पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान एड. गोरे ने दलील दी कि महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम की धारा 35 (3) अनुसार सरपंच पद के चयन से दो वर्ष भीतर अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता। प्रकरण में 20 महीने में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। इस कारण जारी अविश्वास प्रस्ताव पर विशेष सभा का नोटिस गैरकानूनी होने से इस पर स्थगन देने की विनती की। सुनवाई के बाद पीठ ने निष्कर्ष दर्ज किया कि महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम की धारा 35(3) अनुसार सरपंच व उपसरपंच के चुनाव से दो वर्ष भीतर अविश्वास प्रस्ताव लाया नहीं जा सकता। इस कारण विशेष सभा की नोटिस पर अंतरिम स्थगन दिया।
Created On : 13 Feb 2025 1:08 PM