- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- अमरावती
- /
- मार्केटिंग डायरेक्टर के यू-टर्न से...
Amravati News: मार्केटिंग डायरेक्टर के यू-टर्न से मंडी संचालकों को झटका

- ई-टेंडर, सफाई ठेके में 44 लाख के भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई पर जारी स्टे रद्द
- पहली बार किसी सहकारी क्षेत्र में बड़ी गड़बड़ी उजागर
Amravati News कृषि उपज मंडी के ठेकों में धांधली और सफाई ठेके में हुए 44 लाख के भ्रष्टाचार मामले में डीडीआर कार्यालय द्वारा प्रस्तावित कार्रवाई पर मंडी संचालकों द्वारा लाया गया स्टे खुद पणन संचालक कार्यालय ने रद्द कर दिया है। जिससे इस मामले में कार्रवाई के अधिकार जिला उप निबंधक कार्यालय को दोबारा बहाल हो गए हैं। पणन संचालक कार्यालय के इस यू-टर्न से मंडी संचालकों को बड़ा झटका लगा है। उल्लेखनीय है पहली बार किसी सहकारी क्षेत्र में इतनी बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है।
कृषि उपज मंडी अमरावती में सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों पर प्रस्तावित कार्रवाई को टालने के लिए अमरावती कृषि उपज मंडी के संचालक मंडल ने डीडीआर के आदेश को चुनौती देने के लिए विभागीय निबंधक को बायपास कर सीधे पणन संचालक कार्यालय (पूणा) में दौड़ लगाई थी। पणन संचालक विकास रसाल ने 3 फरवरी को जारी आदेश में डीडीआर की कार्रवाई पर स्टे जारी किया था। जिस पर शिकायतकर्ता ने मंडी प्रशासन की हरकतों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कर पणन संचालक कार्यालय की भूमिका पर संदेह जताया था। इस मामले में 13 मार्च को पणन संचालक कार्यालय में सुनवाई हुई। जिसमें मार्केटिंग डायरेक्टर ने यह स्टे रद्द कर दिया।
क्या है मामला : किसान संघर्ष समिति के सचिव शेखर औगड़, प्रकाश साबले, उमेश महिंगे, राहुल तायड़े द्वारा दाखिल अमरावती कृषि उपज मंडी में आर्थिक धांधली और नियमबाह्य रूप से ठेके आवंटित करने की प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए जिला उपनिबंधक कार्यालय ने तहसील उपनिबंधक सचिन पतंगे और लेखा परीक्षक सुशील ढोक की जांच समिति से जांच कराई। जिसमें मंडी प्रशासन ने प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार 44 लाख रुपए के कार्यों और तीन विद्युत कार्यों को मंजूरी दी थी। इन कार्यों का टेंडरिंग ई-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से करना था। लेकिन मंडी प्रशासन ने बिना टेंडरिंग के ही अवैध तरीके से हितैषी ठेकेदारों को ठेके आवंटित किये। इस निविदा में गंभीर गलतियां मिलीं।
इसी के साथ ही कई अनियमितताओं में भी मंडी व्यवस्थापन को दोषी पाया। जिनमें संचालक मंडल के अनुमोदन आदेश को मंजूरी न देना, विज्ञापन में अनियमितताएं, टेंडर प्रक्रिया में असंवैधानिक कार्य के आरोप तथा ठेकेदारों को अग्रिम राशि देने में विभिन्न त्रुटियां पाई जाना शामिल हैं। सफाई ठेके में भी जब स्वराज संस्था का सफाई ठेका समाप्त होने वाला था, तो उन्हें ठेका समाप्त होने से पूर्व की पूर्व नियोजित तैयारियां नहीं कराई गईं और उन्हें 15 प्रतिशत की दर वृद्धि के साथ समयावृद्धि और ठेका दे दिया गया। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही मंडी प्रशासन में खलबली मची और उन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए सीधे पणन संचालनालय कार्यालय, मुंबई में दौड़ लगाकर जिला उप निबंधक को चैलेंज किया था।
Created On :   18 March 2025 1:27 PM IST