MP News: बजट में डिंडोरी को मिली बड़ी सौगात, पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनेगा, 55 साल पुराने घुघवा जीवाश्म पार्क की संवारी जाएगी सूरत

- बजट में मोहन सरकार ने डिंडोरी को दी बड़ी सौगात
- घुघवा जीवाश्म पार्क के पुर्ननवीकरण को दी मंजूरी
- 75 एकड़ में फैला है 55 साल पुराना पार्क
डिजिटल डेस्क,डिंडोरी (पीयूष उपाध्याय)। 18 जीव-वैज्ञानिक कुल (परिवार)के 31 वंशों के पौधों के जीवाश्म (फॉसिल) को अपने में समेटे घुघवा जीवाश्म (फासिल्स) राष्ट्रीय उद्यान की आखिर सरकार ने सुध ली। करीब 75 एकड़ में फैले इस पार्क के पुर्ननवीकरण को प्रदेश की मोहन सरकार ने अपने बजट में शामिल कर लिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 55 साल पुराने इस पार्क के पुर्ननवीकरण के लिए अभी राशि (बजट) का प्रावधान नहीं किया गया है लेकिन सरकार द्वारा इसे बजट में शामिल कर लिए जाने से इस पार्क की सूरत तो संवरेगी ही, बैगा बहुल्य डिंडोरी देश के पर्यटन नक्शे पर भी आ जाएगा।
जीएसआई के साथ होगा सर्वे
साढ़े पांच दशक पुराने घुघवा जीवाश्म पार्क की सूरत संवारने वन विभाग, पर्यटन विभाग के साथ मिल कर काम करेगा। वन विभाग केे अधिकारियों के अनुसार यहां बाउंड्री वॉल की समस्या सबसे गंभीर है। इसके अलावा जनसुविधा के उद्देश्य से बनाए गए प्रसाधन आदि भी जर्जर हो चुके हैं । डीएफओ पुनीत सोनकर के अनुसार, घुघवा पार्क को पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनाने जीएसआई के साथ प्रयास किया जा रहा है। देश के इस पहले जीवाश्म पार्क को अपग्रेड करते हुए विकसित करने पर्यटन विभाग के साथ मिल कर काम किया जाएगा। दोनों विभाग के अधिकारी मिल कर प्रस्तावों को अंतिम रूप देंगे।
1970 में हुई थी खोज
देश के इस पहले जीवाश्म पार्क की खोज 1970 में भू-वैज्ञानिक डॉक्टर धर्मेन्द्र प्रसाद ने की थी। उन्हें यहां करोड़ वर्ष पुराने पौधों, पत्तों, फलों, बीजों और शंखों के करीब साढ़े छह करोड़ साल पुराने जीवाश्म (फासिल्स) मिले थे। पौधों और पत्तियों के जीवाश्म की अनवरत चली खोज के बीच 1983 में सरकार ने घुघवा को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया। यह उद्यान पिछले दशकों में डायनासोर के अण्डे का जीवाश्म मिलने के बाद खासा चर्चा में आया। जीवाश्म के जानकारों ने डायनासोर के इस अंडे को 6 करोड़ साल पुराना बताया था।
यह भी पढ़े -मध्यप्रदेश की हर विधानसभा में होगा खेल स्टेडियम विश्वास सारंग
यूकेलिप्टस और ताड़ के भी जीवाश्म
घुघवा में दुनिया के सबसे पुराने यूकेलिप्टस और ताड़े के पेड़ों के जीवाश्म के साथ आम, केला, जामुन, चिरोंजी, नारियल, हर्रा तथा रूद्राक्ष के भी जीवाश्म मौजूद हैं। यहसब डायनासोरकाल के समय के फल व बीज हैं, जो आज जीवाश्म के रप में घुघवा में मौजूद हैं। पत्थर बन चुके पेड़-पौधे व झाडिंयां आदि देख यह विश्वास कर पाना मुश्किल होता है कि यह सब करीब साढ़े छह करोड़ साल पुराने हैं।
Created On :   13 March 2025 1:56 PM IST