प्रयागराज बुलडोजर कार्रवाई मामला: 'धुंआधार' बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, कहा- 'ये मनमानी नागरिक अधिकारों का हनन'

धुंआधार बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, कहा- ये मनमानी नागरिक अधिकारों का हनन
  • 'धुंआधार' बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती
  • कहा- 'ये मनमानी नागिरक अधिकारों का हनन'
  • अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने राज्य सरकार का रखा पक्ष

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अलावा देशभर में जारी बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त नजर आ रही है। इसी सिलसिले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में साल 2021 में हुए प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन महिला के घरों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि घर गिराने की प्रक्रिया असंवैधानिक थी। घर ध्वस्त करने की ये मनमानी प्रक्रिया नागरिक अधिकारों का असंवेदनशील तरीके से हनन भी है।

कोर्ट ने कहा- घटना हमारी अंतरात्मा को झकझोरता है। राइट टू शेल्टर नाम की भी कोई चीज होती है। मामले में नोटिस और अन्य प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि पांचों पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये का हर्जाना दिया जाए।

तोड़फोड़ पूरी तरह से अमानवीय और गैरकानूनी- एससी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि बुलडोजर द्वारा की गई तोड़फोड़ पूरी तरह से अमानवीय और गैरकानूनी था। जिसके चलते मुआवजा लगाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तोड़फोड़ अवैध थी और आश्रय के अधिकार का उल्लंघन भी था। कोर्ट ने कहा कि इस तरह से तोड़फोड़ करना प्रयागराज विकास प्राधिकरण की असंवेदशीलता को दर्शाता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के ठीक 24 घंटे पहले नोटिस भेजा गया। जिसके तुरंत बाद बुलडोजर चला दिया गया। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, साल 2021 में पहले एक मार्च को उन्हें नोटिस जारी किया गया था, उन्हें 6 मार्च को नोटिस मिला। फिर अगले ही दिन 7 मार्च को मकानों पर बुलडोजर एक्शन लिया गया। अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की।

अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने राज्य सरकार का रखा पक्ष

बता दें कि, याचिकाकर्ताओं ने पहले हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन हाई कोर्ट में याचिका को खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आगे से नोटिस देने में पर्याप्त उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लिए अनधिकृत कब्जा छुड़ाना और इसे रोकना मुश्किल काम है।

Created On :   1 April 2025 4:52 PM IST

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