Chhindwara News: स्कूल खुलने को बीत गए ढाई माह, तय नहीं कर पाए कौन पढ़ाएगा और कैसे पढ़ाएगा
- 517 प्री-प्राइमरी और नर्सरी कक्षाओं में दर्ज हजारों बच्चे
- नहीं आई अब तक पुस्तकें
- 3 से 5 वर्ष आयु समूह के बच्चों को कराया गया चयनित शालाओं में दर्ज
Chhindwara News: स्कूलों को खुले तकरीबन ७० दिन बीत चुके हैं लेकिन अब भी जिले के सरकारी स्कूलों में खोली गई ५१७ प्री-प्रायमरी और नर्सरी कक्षाओं की पुस्तकें अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिला शिक्षा केन्द्र की ओर से इसकी मॉनीटरिंग करने के लिए अधिकारी नियुक्त किए हैं। इसके बावजूद अब तक इन कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक और पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई है। नतीजतन इतने दिन बीत जाने के बावजूद 517 प्री प्राइमरी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों की जैसे-तैसे पढ़ाई चल रही है। इन सभी स्कूलों में तकरीबन साढ़े पांच हजार से ज्यादा बच्चें पढ़ते हैं।
प्राइमरी स्कूलों में लग रही कक्षाएं
जिले के शासकीय स्कूलों में इन कक्षाओं को खोल दिया गया है। एक जुलाई से यहां पर नियमित कक्षाएं लग रही है। वर्तमान में प्राइमरी स्कूल की कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षक ही इन विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। पिछले सत्र की कुछ पुस्तकों के जरिए इन विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। पहले तक ऐसी शाला परिसर जहां पर आंगनबाड़ी भवन है उन स्थानों पर कक्षाएं नहीं लगाने के लिए कहा है। पिछले दिनों हुई काउंसलिंग के बाद बहुत से शिक्षक का तबादला हो चुका है ऐेसे में कक्षाएं संचालन में परेशानी हो रही है।
अब तक यह हुआ
ञ्च जिले की 517 शासकीय शालाओं में पूर्व प्राथमिक कक्षा नर्सरी, केजी.1, केजी.2 की कक्षाएं 01 जुलाई से हो चुकी हैं। इन कक्षाओंं में 3 से 5 वर्ष आयु समूह के बच्चों को चयनित शालाओं में दर्ज कराया गया है।
ञ्च जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र के अनुसार समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत 3-5 वर्ष आयु समूह के बच्चों के लिए जिले की चयनित 517 शासकीय शालाओं में पूर्व प्राथमिक कक्षा नर्सरी, केजी.1, केजी.2 की कक्षायें 01 जुलाई से प्रारंभ की गई है।
जिले में अब तक ऐसे हैं हाल
कुल प्री-प्रायमरी स्कूल- 517
नर्सरी- 3262
केजी वन- 3500
केजी टू- 3090
कुल विद्यार्थी- 9852
इनका कहना है
प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा जल्द ही पुस्तक उपलब्ध कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कक्षाएं फिलहाल नियमित चल रही है।
जे.के.इड़पाची, डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र