जबलपुर: अरबों रुपए खर्च, फिर भी व्यवस्थित नहीं हो पाए सीवर लाइन के ढक्कन

  • कहीं सड़क से ऊपर तो कहीं नीचे, वाहन का चका पड़ते ही उछल जाता है आदमी
  • स्कूली छात्रों से लेकर बुजुर्ग तक हर माह दर्जनों हो रहे घायल

Bhaskar Hindi
Update: 2023-09-16 09:23 GMT

डिजिटल डेस्क,जबलपुर।

सीवर लाइन का प्रोजेक्ट बीते 16 सालों से शहर के लिए किसी न किसी तरह से भारी पड़ रहा है। इस आधे-अधूरे प्रोजेक्ट में जहाँ लाइन बिछाई जा चुकी है उसमें चैम्बरों के ढक्कन को कुछ इस तरह से फिट किया गया है कि ये कहीं उभरे हुये सड़क से ऊपर हैं तो कहीं एकदम सड़क से 8 से 10 इंच तक नीचे हैं। इस तरह किसी तरह के मानकों का पालन इसमें नहीं हुआ, अब स्थिति यह है कि सीवर के ढक्कन कई हिस्सों में लोगों को मौत बाँट रहे हैं। स्कूली छात्र से लेकर बड़े बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक हो या फिर कार चालक किसी के लिए भी कुछ एरिया में सड़क पर चलते वक्त ऐसे ढक्कनों से बच पाना बेहद मुश्किल है। सीवर के ऐसे ढक्कनों से घायल हो रहे लोगों का कहना है कि  नगर निगम इस आधी अधूरी या फेल हो चुकी योजना में कम से कम जानलेवा हो चुके ढक्कनों को ही व्यवस्थित करा दे तो लाखों लोगों को राहत मिल सकती है। नगर निगम ने यदि कोई योजना बनाकर सड़कों पर इन सीवर के ढक्कनों को नहीं सुधारा तो हर महीने दर्जनों लोग घायल होते रहेंगे।

इन हिस्सों में जानलेवा हैं हालात

उखरी पुलिस चौकी के सामने, एमआरफोर कछपुरा ब्रिज के नजदीक, शिव नगर साईं मंदिर रोड, कृषि उपज मंडी की ओर, गौतम मढ़िया गढ़ा रोड, मेडिकल सगड़ा रोड सिग्नल के नजदीक शहर की ऐसी दर्जनों सड़क हैं जिनमें सीवर के ये ढक्कन ट्रैफिक के पीक ऑवर्स में लोगों की परीक्षा लेते हैं। थोड़ी सी गफलत की तो इनसे आदमी घायल हो जाता है।

सड़क बनाने के दौरान भी अनदेखी

जब भी कोई सड़क सीमेण्टेड होती है या डामरीकरण होता है तो ऐसा लगता है जैसे उभरे हुये सीवर के ढक्कन को इस बार ठीक कर दिया जाएगा लेकिन अफसोस नई सड़क बनने के बाद सीवर का ढक्कन और नीचे पहुँच जाता है और हादसों को और ज्यादा बढ़ाने लगता है। अमूमन शहर के हर हिस्से में एक न एक ऐसा खतरनाक सीवर का ढक्कन देखा जा सकता है जो पूरे एरिया के लिए जान का खतरा बना हुआ है।

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