एसआईटी जांच के निष्कर्षो की कश्मीर के राजनीतिक दलों ने की आलोचना, मुठभेड़ को पुलिस ने बताया मनगढ़ंत और कवर-अप कहानी

हैदरपोरा मुठभेड़ एसआईटी जांच के निष्कर्षो की कश्मीर के राजनीतिक दलों ने की आलोचना, मुठभेड़ को पुलिस ने बताया मनगढ़ंत और कवर-अप कहानी

Bhaskar Hindi
Update: 2021-12-29 13:31 GMT
हाईलाइट
  • पुलिस की प्रेस वार्ता केवल पुरानी कहानी की पुनरावृत्ति

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) के 15 नवंबर के हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच के निष्कर्षो की कश्मीर के मुख्यधारा के राजनेताओं ने काफी आलोचना की है।

पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) ने बुधवार को कहा कि हैदरपोरा मुठभेड़ पर जम्मू-कश्मीर पुलिस का बयान मनगढ़ंत और एक कवर-अप कहानी है। एक बयान में पीएजीडी ने कहा पिछले महीने की हैदरपोरा दुखद घटना के बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस की आज की प्रेस वार्ता केवल पुरानी कहानी की पुनरावृत्ति है। यह इस चौंकाने वाली घटना की कोई वस्तुनिष्ठ तस्वीर भी पेश नहीं करती है।

बयान के अनुसार एक मजबूत सार्वजनिक धारणा है कि घटना में मारे गए नागरिकों को सुरक्षा बलों द्वारा मानव ढाल बनाया गया था और पुलिस का नवीनतम बयान एक मनगढ़ंत, कवर-अप कहानी थी। बयान में कहा गया है यह बड़े पैमाने पर लोगों और मारे गए पीड़ितों के परिवार की वैध चिंताओं को पूरा नहीं करेगा।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एसआईटी के निष्कर्षों को खारिज कर दिया है। महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि हैदरपुरा मुठभेड़ में एसआईटी द्वारा सुरक्षा बलों को दी गई क्लीन चिट आश्चर्यचकित नहीं करती है। उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि जांच एक गलत अभियान की लीपापोती करने के लिए की गई।

एसआईटी निष्कर्षों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा ने एक ट्वीट में कहा हैदरपोरा मुठभेड़ में सशस्त्र बलों को एसआईटी की क्लीन चिट आश्चर्यचकित नहीं करती है। यह विशुद्ध रूप से एक गलत अभियान की लीपापोती करने और बेकसूर नागरिकों की हत्या के दोषियों को दोषमुक्त करने के लिए थी। जब वे खुद ही जज, जूरी और जल्लाद हैं, तो कोई न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने हैदरपोरा मुठभेड़ पर एसआईटी की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह अपेक्षित तर्ज पर हुआ है और यह सैकड़ों सजावटी या गढ़ी हुई जांच के अलावा एक और ऐसी ही जांच थी। बता दें कि 15 नवंबर को श्रीनगर शहर के हैदरपोरा इलाके में हुई मुठभेड़ मामले में विशेष जांच दल ने सुरक्षा बलों को क्लीन चिट दे दी है।

एसआईटी ने कहा है कि एक आम नागरिक को विदेशी आतंकवादी ने मारा जबकि जिस घर में एनकाउंटर हुआ था, उस घर के मालिक को एक स्थानीय आतंकवादी ने क्रॉसफायर के दौरान गोली मार दी। एसआईटी ने कहा कि घर में छिपे आतंकवादी ने उनका इस्तेमाल मानव ढाल के तौर पर किया था। जम्मू और कश्मीर पुलिस की एक विशेष जांच टीम इस एनकाउंटर की जांच कर रही थी।

उस मुठभेड़ में तीन स्थानीय निवासियों और एक पाकिस्तानी आतंकवादी सहित चार लोग मारे गए थे। मारे गए लोगों में से तीन लोगों के घरवालों ने हालांकि दावा किया था कि वे सभी निर्दोष थे और फर्जी मुठभेड़ के शिकार बन गए। इसके बाद घाटी में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। कहा गया था कि मरने वालों में एक मुदासिर गुल पेशे से डॉक्टर था। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस इस मामले की जांच कराने के लिए विवश हो गई थी।

सुजीत कुमार डीआईजी (मध्य कश्मीर) ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि अल्ताफ भट आतंकवादियों की गोलीबारी में क्रॉस फायरिंग में मारा गया। मुदासिर गुल को पाकिस्तानी आतंकवादी ने जानबूझकर गोली मारकर हत्या कर दी थी, जबकि आमिर माग्रे मारे गए आतंकवादी का सहयोगी था। भट और मुदासिर के शव परिवारों को सौंप दिए गए हैं, जबकि आमिर माग्रे का शव अभी तक कब्र से नहीं निकाला गया है।

 

(आईएएनएस)

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