अफसरों और राइस मिलर्स की मिलीभगत, धार ले जाने के नाम पर सिवनी,बालाघाट से अनुबंध कर वहां के लोकल में ही बेच दी! धार को टिकाया दूसरे राज्यों से लाया गया घटिया चावल
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डिजिटल डेस्क, धार। मप्र में 12 करोड़ का धान घोटाले का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर ने सूचना के तहत प्राप्त दस्तावेनों से बड़े धान घोटाले को उजागर किया है। अफसरों ओर धार के राइस मिलर्स ने मिलीभगत कर नियम विरुद्ध अनुबंध जारी कर न सिर्फ करोड़ों रुपये का धान घोटाला किया साथ ही शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान पहुचाने का भी भरकस प्रयास किया।
धान बिक्री खरीदी के ये हैं नियम?
मप्र में अनुबंध के तहत धान खरीदी का कार्य 'मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ' (मारफेड)नागरिक आपूर्ति निगम(नाम) प्रदेश के कुछ संभागों में धान खरीदती है और चावल का भी प्रिक्योरमेंट करती है।उल्लेखनीय है मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ(मारफेड) कहीं भी चावल परचेस नही करती, वहीं नागरिक आपूर्ति निगम प्रदेश के कुछ संभागों में धान परचेस भी करती है और चावल पूरे प्रदेश को प्रदाय भी करती है। नियम के मुताबिक ओर अनुबंध के तहत मिलर्स को गवर्मेंट से जो धान मिलती है उस धान को मील प्रेमाइसेस में ले जाकर धान से चावल निर्मित कर उसे शासन को प्रदाय करना होता है।
इस तरह किया करोड़ो का घोटाला
दिनांक 11 अक्टूबर 2022 को हुए अनुबंध के तहत मप्र के धार जिले में स्थित राइस मिल अनुश्री ट्रेडर्स ओर कृष्णा इंडस्ट्रीज़ द्वारा मप्र के बालाघाट ओर बारा सिवनी से 167 लॉट धान धार लाना था, जिसका अनुबंध सिवनी नागरिक आपूर्ति निगम और बालाघाट मारफेट से 11अक्टूबर 2022 को हुए अनुबंध के मुताबिक उक्त धान को धार लाना था।लेकिन धार की दोनों राइस मिलर्स ने बालाघाट ओर सिवनी जिले से धान धार लाने के बजाय सिवनी,बालाघाट,और गोंदिया के लोकल मिलर्स को बेच दिया? वहीं दूसरे राज्यों से घटिया ओर निम्न स्तर का अमानक चावल धार नागरिक आपूर्ति निगम को लाकर टिका दिया और करोड़ों का घोटाला कर डाला। नीति-नियमों से परे जाकर न सिर्फ अनुबन्ध कर करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ अर्जित किया साथ ही शासन से परिवहन के जरिये मिलने वाले 1 करोड़44 लाख42 हजार रुपये राजस्व को भी गटकने का प्रयास किया। लेकिन,भास्कर टीम की पड़ताल के बाद मिलर्स फिलहाल अपने मंसूबों में कामयाब नही हो पाए।
नीति-नियम की ऐसे उड़ाईं धज्जियां
अनुबंध ओर नियमानुसार स्थानीय जिलों से ही धान की मिलिंग का अनुबंध किया जा सकता है ,खरीदी की जा सकती है।स्थानीय जिले में पर्याप्त धान उपलब्ध न होने पर संबंधित जिले से एनओसी लेकर निकटतम जिले से धान की मिलिंग का अनुबंध करने,खरीदने का नियम है। लेकिन इससे उलट मध्यप्रदेश के अंतिम छोर पर बालाघाट ओर सिवनी हैं वही दूसरी तरफ धार जिला गुजरात की बॉर्डर पर है।करीब 500 किमी से अधिक की दूरी नाप कर धान खरीदी का तुगलकी फरमान किस अफसर द्वारा किस वजह से दिया गया ये बारीकी से जांच किये जाने का विषय है।
धान की क्वॉलिटी पर खेल डाला खेल
दरअसल मध्यप्रदेश के बालाघाट ओर सिवनी में आला दर्जे की धान होती है जो धार ओर उसके आसपास के जिलों से कई गुना बेहतर होती है।धार जे मिलर्स ने अच्छी क्वालिटी का धान बालाघाट ओर सिवनी से खरीदकर उसे मोटे दामों में वहीं आसपास के जिलों के मिलर्स को बेच दिया और इधर धार में घटिया ओर हल्के दर्जे का चावल दूसरे राज्यों से अनाधिकृत रूप से ला कर करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ अर्जित किया।
ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा
धान खरीदी की दूरी को देखते हुए दैनिक भास्कर की टीम ने बारीकी से पड़ताल की तो चोंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुख्ता प्रमाण के लिए भास्कर के इंदौर रिपोर्टर ने 'मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई'कारपोरेशन धार,बालाघाट ओर सिवनी से सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज प्राप्त किये। दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन कर बालाघाट ओर सिवनी से धार धान सप्लाई करने वाले ट्रांसपोर्टर महाराष्ट्र,गुजरात ओर राजस्थान समेत बालाघाट,सिवनी के स्थानीय वाहनों का स्तेमाल किया जाना पाया गया जिसकी सूची आरटीआई के जरिये प्राप्त हुई,लिहाजा सूचीबद्ध कुछ वाहन संचालकों से भास्कर की टीम ने धान सप्लाई को लेकर बात की तो ज्यादातर ने ऐसी किसी भी तरह की धान सप्लाई किये जाने से साफ इनकार कर दिया। वहीं कुछ वाहन संचालाकों ने धान सप्लाई को लेकर किसी भी तरह की बात करने से भी इंकार कर दिया।
12 करोड़ का167 लॉट धान बेच डाला?
धार की अनुश्री ड्रेडर्स ओर कृष्णा इंडस्ट्रीज़ मिलर्स ने भोपाल में बैठे आलाअफसरों की मिलीभगत से कुल 167 लॉट धान बालाघाट ओर सिवनी से लेकर वहीं आस-पास के राइस मिलर्स को बेच डाला । विदित हो कि एक लॉट में 433 क्विंटल धान होता है। ऐसे में कुल 167 लॉट धान वहीं बालाघाट ओर सिवनी से उठाकर वहीं के मिलर्स को बेच डाला गया ! धार जिले में एक मुट्ठी भी धान नही आई वहीं दूसरी तरफ दूसरे राज्यों से घटिया दर्जे का अमानक चावल खरीद कर धार पहुचा दिया गया जो अब गरीब उपभोक्ताओं को राशनकार्ड के जरिये बांटा जाएगा।
'पुराना मामला होगा मेरे संज्ञान में नही है।कल पूरी जानकारी लेकर बताता हूँ' - आलोक सिंग (एमडी,मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ,भोपाल)
इस मामले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी तरुण कुमार पिथोड़े से बात करना चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया।
Created On :   20 Jan 2023 7:20 PM IST