MP News: 'मैं उनकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं.. उन्होंने शिक्षा नीति देखी ही नहीं..', सीएम मोहन यादव का सोनिया गांधी पर तीखा हमला

- सोनिया गांधी ने नई शिक्षा नीति को लेकर उठाए सवाल
- मोदी सरकार पर संघीय ढांचे को खत्म करने का लगाया आरोप
डिजिटल डेस्क, भोपाल। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने एक अखबार के आर्टिकल में लिखा, केंद्र सरकार शिक्षा नीति के माध्यम से अपने 3 सी एजेंडे (केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकता) को आगे बढ़ा रही है। शिक्षा नीति भारत के युवाओं और बच्चों की शिक्षा के प्रति सरकार की गहरी उदासीनता को दिखाती है।'
सोनिया गांधी के इस लेख की मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मैं उनके लेख की कटू शब्दों में निंदा करता हूं। उन्होंने नई शिक्षा नीति देखी ही नहीं है।
सोमवार को महेश्वर के नाट्य मंचन में पहुंचे सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "अगर सोनिया गांधी देश के शिक्षाविदों से बात करने के बाद NEP 2020 पर बोलतीं, तो बेहतर होता। यह उनके सीमित ज्ञान का नतीजा है। आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस ने शिक्षा को मजाक बना कर रख दिया था, यह उजागर हो चुका है। प्रधानमंत्री ने नई शिक्षा नीति 2020 तैयार की, 1968 और 1986 के बाद यह तीसरी शिक्षा नीति थी। पहले दोनों मौकों पर लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति का सिर्फ आवरण बदला गया। महाराणा प्रताप, शिवाजी के साथ अन्याय हुआ और आक्रमणकारियों को महिमामंडित करने का प्रयास किया गया...अंग्रेजों और कांग्रेस ने सब कुछ नजरअंदाज कर बेरोजगारों की फौज बढ़ा दी।
माफी मांगे सोनिया गांधी
सीएम ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2 लाख से ज्यादा लोगों के साथ बैठकें की गईं और इस शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया गया...तत्कालीन राज्य शिक्षा मंत्री के तौर पर मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि शिक्षा नीति को लागू करने वाला हमारा पहला राज्य था...आज 55 जिलों में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज हैं...यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि सोनिया गांधी ने एक तरह से विद्वानों का मजाक उड़ाया है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए..."
शिक्षा संघीय ढांचे को कमजोर कर रही सरकार
सोनिया गांधी ने अपने लेख में लिखा, मोदी सरकार राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों से बाहर रखकर शिक्षा के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है। शिक्षा नीति में केंद्र सरकार ने सारी ताकत अपने हाथ में ले ली है और सिलेबस और संस्थानों में सांप्रदायिकता फैलाई जा रही है।
Created On :   1 April 2025 2:52 AM IST