गजकेसरी योग का कुंडली के विभिन्न भावों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
डिजिटल डेस्क, भोपाल। हर जातक की कुंडली में कुछ योग कुंडली में उसके जन्म के साथ ऐसे बनते हैं जो उसके जीवन को संवार देते हैं। इन प्राकृतिक संयोगों के कारण जातकों के जीवन में कभी भी किसी चीज का अभाव नहीं होता। ऐसे ही सौभाग्यशाली योगों में से एक है गजकेसरी योग।
गजकेसरी योग एक बहुत ही शुभ योग माना जाता है। यह प्रमुख धन योगों में से एक होता है जो गुरु और चंद्र के योग से बनता है। जातक की कुंडली के किसी भी भाव में गुरु व चंद्रमा की युति हो और किसी पाप ग्रह की दृष्टि उन पर न पड़ रही हो या कोई पाप ग्रह उनके साथ न हो तो यह योग बहुत शुभफलदायी माना जाता है। ये योग जिस प्रकार जातक की रासि में पाया जाता है। वैसे ही कुंडली के अलग-अलग भावों में भी इसका अलग प्रभाव पड़ता है। चलिए आपको बताते हैं कुंडली के अलग-अलग भावों में गजकेसरी योग का किस प्रकार प्रभाव पड़ता है।
1. पहले भाव में
लग्न में यह योग बने तो जातक कोई नेता या अभिनेता होता है। ऐसे जातक को देखने के लिए जनता उतावली हो जाती है। उसका रहन सहन राजाओं जैसा होता है। यह योग जातक को गलत रास्ते पर भी जाने से रोकता है। जातक ईश्वर को मानने वाला होता है।
2. दूसरे भाव में
ये योग दूसरे भाव में बने तो जातक उच्च घराने में जन्म लेता है, वाणी का धनी होता है, धन सम्पदा की कमी नहीं रहती। ऐसे जातक की बात को गौर से सुना जाता है। ऐसे जातक कथा वाचक और बड़े-बड़े साधू संत भी देखे गए हैं।
3. तीसरे भाव में
तीसरे भाव में यह योग बने तो भाई बहन को भी उच्च पद पर ले जाता है। जातक बहुत पराक्रमी और मान-सम्मान वाला होता है।
4. चौथे भाव में
चौथे भाव में यह योग बने तो मां से अत्यंत प्यार और लाभ मिलता है। भूमि और वाहन का उच्च सुख प्रदान होता है। रहने के लिये अच्छा निवास स्थान होता है।
5. पंचम भाव में
पंचम भाव में यह योग बने तो बुद्धि के बल पर धन कमाने का संकेत होता है। जातक बुद्धिमान होता है। ऐसा जातक अच्छा स्कूल टीचर, वैज्ञानिक, नए नए अविष्कार करने वाला होता है। ऐसा जातक उच्च कोटि का लेखक भी बन सकता है। ऐसे जातक को पूर्ण संतान का सुख मिलता है, संतान के उच्च पद पर आसीन होने के योग भी बनते हैं।
6. छठे भाव में
छठे भाव में यह योग कुछ कमजोर पड़ जाता है। छठे भाव में गुरु शत्रुहंता होता है। शत्रु दब कर रहते हैं साथ में चंद्रमा मन और माता के लिए ठीक नहीं होता उनका स्वास्थ्य बिगड़ा सा रहता है।
7. सप्तम भाव में
यह भाव जीवन साथी का होता है जीवन साथी उच्च पद पर आसिन होता है। उच्च घराने में शादी करवाता है। जीवन साथी उच्च विचारों वाला होता है।
8. अष्टम भाव में
अष्टम भाव का गजकेसरी योग भी कमजोर पड़ जाता है। यह योग जातक को गुप्त विद्या में ले जाता है इस योग में बड़े-बड़े तांत्रिक और साधू संत देखे जाते हैं। यह योग कई बार अचानक धन भी दिलवा देता है। यह योग गुप्त धन की प्राप्ति जरूर देता है। जातक कल्पना भी नहीं कर सकता वहां से धन की प्राप्ति हो जाती है।
9. नवम भाव में
नवम भाव में गजकेसरी योग जातक को कर्म से ज्यादा भाग्य के द्वारा मिल जाता है। नवम भाव धर्म और भाग्य का माना गया है। ऐसा जातक बहुत भाग्य शाली होता है और भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखता है।
10. दशम भाव में
दसवें भाव में गजकेसरी योग पिता को उच्च पद पर ले जाता है। जातक को भी उच्च पद प्राप्त होता है। जातक भाग्य से ज्यादा कर्म को महत्व देता है समाज में मान-सम्मान दिलवाता है।
11. ग्यारहवे भाव में
ग्यारहवे भाव में गजकेसरी योग जातक की आय के एक से अधिक स्रोत होते हैं। जातक को कई प्रकार से इनकम आती है कम मेहनत मे ज्यादा पैसा का संकेत होता है। ऐसा जातक घर बैठे पैसा कमाता है।
12. बारहवें भाव में
बारहवें भाव में गजकेसरी योग कुछ कमजोर पड़ जाता है। जातक धर्म-कर्म पर पैसा खर्च करने वाला घर से दूर सफलता का सूचक होता है।
Created On :   21 July 2018 4:28 PM IST