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प्रमुख सचिव वन श्री बर्णवाल ने देवास जिले में वनाधिकार दावों के निराकरण संबंधी बैठक ली
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डिजिटल डेस्क, देवास। देवास प्रमुख सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने आज गुरूवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में वनाधिकार दावों के निराकरण के संबंध में समीक्षा बैठक ली। बैठक में कलेक्टर श्री चन्द्रमौली शुक्ला, उज्जैन कलेक्टर श्री आशीष सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती शीतला पटले, सीसीएफ श्री अजय कुमार यादव, डीएफओ श्री पीएन मिश्रा, एसडीएम देवास श्री प्रदीप सोनी, बागली एसडीएम श्री अरविंद चौहान, कन्नौद एसडीएम श्री नरेन्द्र धुर्वे, सोनकच्छ एसडीएम शिवानी तरेटीया, खातेगांव एसडीएम श्री संतोष तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में प्रमुख सचिव वन श्री बर्णवाल निर्देश दिये कि वनाधिकार अधिनियम 13 दिसम्बर 2005 से पूर्व काबिज देवास जिले के प्रत्येक पात्र आदिवासी को वनाधिकार पट्टे मिले, इस बात का विशेष ध्यान रखें। जिले में पूर्व में जिन आदिवासियों के वनाधिकार पट्टों के दावों को अमान्य किया गया है। उन्होंने पूर्व आवेदन पर विचार करके अधिकारी पूरी संवेदना एवं तत्परता के साथ एक-एक दावे का परीक्षण करें तथा प्रत्येक पात्र आदिवासी को वनाधिकार पट्टा दिलवाये। आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे देने के लिए 10 दिन का विशेष अभियान चलाये। उन्होंने कहा कि वनअधिकार पट्टो का अभियान चलाकर दावों का परीक्षण कर जो भी कमी है उसे पूरा करे तथा फील्ड पर जाकर पट्टा देने का कार्य करे। नये आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा। श्री बर्णवाल ने कहा कि देवास जिले के बडे किसानों को बॉस की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाये। बडे किसान बॉस की खेती करने से तीन वर्ष बाद बॉस से किसान को लगभग एक लाख रूपये प्रति हैक्टयर की आय होगी। किसान बॉस की फसल के बीच में अन्य फसल गेंहू व अन्य फसल भी बोकर भी लाभ उठा सकते है। बैठक में कलेक्टर श्री चन्द्रमौली शुक्ला ने बताया कि देवास जिले में ग्राम वन अधिकार समितियों द्वारा अभी तक 6 हजार 255 प्रस्तुत दावों में 4 हजार 423 दावे सत्यापन के लिए चुने गये। 2 हजार 231 दावे सत्यापन के लिए लम्बित है। आदिवासियों के दावों का पुन: सर्वे कर सत्यापन करके वनाधिकार पट्टे पात्र हितग्राहियों को दिये जायेगे। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र वनवासी दावेदार अपने वन अधिकार के हक से वंचित न हो। दावेदार को अपने दावों के समर्थन में लगाये जाने वाले दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के लिये वन विभाग एवं राजस्व विभाग को निर्देश दिये गये हैं। एम.पी. वनमित्र पोर्टल के माध्यम से दावों का निराकरण करते समय दावेदारों को भी पर्याप्त सुनवाई के अवसर उपलब्ध कराये जा रहे है। प्रदेश में वन अधिकार के दावों का निराकरण अभियान के रूप में किया जा रहा है।
Created On :   23 July 2020 6:40 PM IST