आपदा: उत्तराखंड के सोनप्रयाग में अस्थाई पैदल पुल बहा, आवागमन ठप
केदारनाथ यात्रा के पड़ाव सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से सेना द्वारा सोन और मंदाकिनी के संगम के पास बनाया गया अस्थायी पैदल पुल बह गया। बीती रात हुई भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया जिसके कारण सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी पर सेना द्वारा बनाया गया अस्थाई पुल बह गया।
सोनप्रयाग, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केदारनाथ यात्रा के पड़ाव सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से सेना द्वारा सोन और मंदाकिनी के संगम के पास बनाया गया अस्थायी पैदल पुल बह गया। बीती रात हुई भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया जिसके कारण सोनप्रयाग में मंदाकिनी नदी पर सेना द्वारा बनाया गया अस्थाई पुल बह गया।
बता दें कि इस स्थान पर सेना ने दो पुल बनाए थे, जिसमें से एक पुल संगम के पास नदी पार कर सोनप्रयाग की ओर बनाया गया था। मंगलवार रात भारी बारिश के कारण यह पुल बह गया।
वहीं भारी बारिश के चलते केदारनाथ घाटी में हुए भारी नुकसान को लेकर मंगलवार को पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने केदारघाटी में अतिवृष्टि के चलते हुए नुकसान, रेस्क्यू और बचाव कार्य, यात्रा को दोबारा शुरू करने को चल रही तैयारियों की समीक्षा की।
राहत-बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि क्षतिग्रस्त मार्गों, पेयजल और विद्युत लाइनों को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग से जुड़े सभी विभागों की समीक्षा करते हुए सभी जानकारियां ली। इस दौरान उन्होंने आला-अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने को लेकर जरूरी कदम उठाए जाएं। इससे पहले उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया था।
उन्होंने बताया कि श्री केदारनाथ धाम की यात्रा को फिर से संचालित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्री केदारनाथ धाम की यात्रा बुधवार से हैली के माध्यम से फिर से संचालित हो जाएगी। हेली सेवा के माध्यम से केदारनाथ दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालुओं को किराए में 25 प्रतिशत छूट देने की घोषणा करते हुए कहा कि इसका वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने यात्रा शुरू करने के लिए किए जाने वाले कार्यों में भी स्थानीय लोगों के सुझाव और सहायता लेने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिकॉर्ड समय में 12 हजार से अधिक यात्री और स्थानीय लोगों को रेस्क्यू किया गया है। रेस्क्यू अभियान लगभग पूरा हो चुका है।
इसके बाद सरकार और जिला प्रशासन का ध्यान अतिवृष्टि से प्रभावित हुए जनजीवन, प्रभावित क्षेत्र तथा जो सड़क मार्ग भूस्खलन की चपेट में आए हैं, उन्हें दुरुस्त करने पर है। इसके साथ-साथ वैकल्पिक मार्गों पर भी फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है।
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