लापरवाही: नहर है लेकिन पानी नहीं, रबी की फसल नहीं ले पा रहे किसान

- प्रशासन की उदासीनता के कारण बंजर पड़े खेत
- खरीफ में भी नहीं मिलता पानी
- 20 लाख रुपए का कार्य कराया गया
Shahdol News: कृषि को लाभ का धंधा बनाने सरकारी दावों के बीच सैकड़ों एकड़ खेती योग्य जमीन बंजर पड़ी हुई हैं, जबकि खेतों से होकर नहर गुजरी है। नहर में पानी नहीं होने के कारण हजारों किसान परेशान हैं। यह हालात दूरांचल का नहीं बल्कि मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सिंहपुर नहर से लगे खेतों का है। शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते नहर की मरम्मत नहीं किए जाने से यहां के किसान हर साल रबी सीजन की फसलें नहीं उगा पाते।
अवर्षा की स्थिति में खरीफ सीजन की फसलों के लिए भी जब सिंचाई की जरूरत पड़ती है तो किसानों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। गौरतलब है कि अविभाजित जिले के सबसे पुरानी और लंबी (27 किलोमीटर) सिंचाई परियोजना 60-70 के दशक में प्रारंभ की गई थी। सरफा नदी पर बांध बनाकर डायवर्सन के रूप में नहर बनाई गई। इस नहर से सिंहपुर सहित पड़मनियां, पड़रिया, नरगी, उधिया, कंचनपुर व रायपुर की हजारों एकड़ भूमि सिंचित होती थी। समय के साथ नहर की हालत जर्जर होती गई, बांध में मिट्टी के जमाव के चलते जल भराव कम होने लगा। जिससे नहर में पानी आना बंद सा हो गया। जलस्तर कम होने के कारण सिंचाई के साथ जिला मुख्यालय में पेयजल के लिए भी पानी कम पडऩे लगा।
आधी-अधूरी हुई मरम्मत- किसानों की लगातार मांग के बाद गत वर्ष मनरेगा के माध्यम से नहर की साफ-सफाई के लिए 20 लाख रुपए का कार्य कराया गया, लेकिन कार्य आधा-अधूरा ही कराया गया। जिसके चलते नहर में पूरी तरह पानी नहीं आ पा रहा है। किसान रामजियावन शुक्ला, गोविंद शुक्ला, गिरीश यादव, लालमन श्रीवास्तव सहित अन्य का कहना है कि यदि नहर व बांध की जर्जर हालत में सुधार नहीं कराया जाता तो भविष्य में धान की उपज लेना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों की मांग है कि नहर की हालत में सुधार कराया जाए। नहर की मरम्मत व सफाई के लिए सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की है। मनरेगा में कार्य के बाद भी लेबर नहीं आते। इसके लिए संबंधित पंचायतों को आगे आना होगा। प्रतीक खरे, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग
Created On :   20 March 2025 10:26 PM IST