विपश्यना केंद्र का भूखंड आवंटन रद्द, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

Plot allotment of Vipassana center canceled, case reached High Court
विपश्यना केंद्र का भूखंड आवंटन रद्द, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
विपश्यना केंद्र का भूखंड आवंटन रद्द, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कामठी स्थित विपश्यना केंद्र के आस-पास के भूखंड की लीज रद्द होने पर संचालक ओगवा सोसायटी ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताती संस्था अध्यक्षा एड. सुलेखा कुंभारे की याचिका पर हाल ही में सुनवाई करते हुए नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट इस प्रकरण में गुरुवार को सुनवाई करेगा। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड.मसूद शरीफ और एड.आदिल मिर्जा कामकाज देख रहे हैं। 

15 वर्ष के लिए मिली थी लीज
ओगवा सोसायटी सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है। संस्था ने ही कामठी में प्रसिद्ध ड्रैगन पैलेस का निर्माण किया है। 22 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संस्था के डॉ.बाबासाहब आंबेडकर कल्चरल एंड रिसर्च सेंटर का लोकार्पण किया था। विवाद इसी भू-खंड से जुड़ा है। दरअसल संस्था ने वर्ष 2003 में खेल गतिविधियों के नाम पर राज्य सरकार से भू-खंड देने की प्रार्थना की थी। राज्य सरकार ने इसे मान्य करते हुए संस्था को कामठी स्थित खसरा क्रमांक 36/5 में 3.93 एचआर का भूखंड 15 वर्षों के लिए लीज पर दिया था। 

विपश्यना केंद्र बना दिया
सभी औपचारिकता और निर्धारित शुल्क भरने के बाद संस्था को वर्ष 2008 में भू-खंड का अधिकार सौंपा गया। संस्था और जिला खेल अधिकारी के बीच स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बनाने का करार हुआ। काम शुरू तो हुआ, लेकिन ठेकेदार के साथ विवाद के चलते बीच में बंद हो गया। तब से स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का काम पूरा नहीं हो सका है। आगे चलकर संस्था ने इस भू-खंड पर मेडिटेशन सेंटर बना दिया। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति के हाथों इसका उद्घाटन किया गया था। अब चूंकि यहां इतना विकासकार्य हो चुका था, इसलिए वर्ष 2016 में संस्था ने जिलाधिकारी के पास "चेंज ऑफ यूजर" के तहत आवेदन किया। 

राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताया
18 दिसंबर 2020 को जिलाधिकारी कार्यालय ने संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा कि उनकी लीज रद्द क्यों न की जाए। इसके बाद संस्था ने अपना पक्ष रखने का प्रयास किया। लेकिन 30 मार्च 2021 को नजूल तहसीलदार ने संस्था की लीज रद्द करते हुए भू-खंड के अधिकार वापस ले कर जिला खेल अधिकारी को सौंप िदए। याचिकाकर्ता के अनुसार, नई सरकार आने के बाद राजनीतिक मंशा के तहत यह कार्रवाई की गई है। तहसीलदार के आदेश को संस्था ने विभागीय आयुक्त के पास चुनौती दी। 21 मई 2021 को विभागीय आयुक्त ने तहसीलदार के आदेश पर अंतरिम स्थगन लगाया, लेकिन दस ही दिन में स्थगन हटा दिया। तहसीलदार ने भू-खंड का सांकेतिक कब्जा भी ले लिया है। ऐसे में संस्था ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 
 

Created On :   4 Aug 2021 2:48 PM IST

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