Vandana Katariya Retirement: अब नहीं दिखेगा वंदना कटारिया के स्टिक का जादू, 32 साल की उम्र में इंटरनेशनल खेलों को कहा अलविदा

- अब नहीं दिखेगा वंदना कटारिया के स्टिक का जादू
- 32 साल की उम्र में इंटरनेशनल खेलों को कहा अलविदा
- ओलंपिक खेलों में हैट्रिक जड़ने वाली पहली और इकलौती भारतीय हैं वंदना
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और स्टार फॉर्वड खिलाड़ी वंदना कटारिया ने अंतराष्ट्रीय खेलों को अलविदा कह दिया है। ओलंपिक खेलों में हैट्रिक जड़ अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली वंदना ने आज यानी मंगलवार 1 अप्रैल को अपने 15 सालों के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत कर दिया है। बता दें, 32 साल की इस खिलाड़ी ने अपने 15 साल लंबे करियर में कुल 320 मैच खेल चुकी हैं। इसी के साथ वह सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने वाली भारतीय हॉकी खिलाड़ी हैं।
जानकारी के लिए बता दें, कटारिया ने साल 2009 में सीनियर टीम में डेब्यू कर अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत की थी। अपने करियर में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में साउथ अफ्रीका की टीम के खिलाफ हैट्रिक जड़ एक अलग नाम कमाया था। वह ऐसा करने वाली पहली और इकलौती भारतीय खिलाड़ी हैं। बता दें, टोक्यो ओलंपिक्स में वंदना अपने शानदार खेल की वजह से चौथे स्थान पर रही थी।
हरिद्वार के रोशनाबाद की रहने वाली वंदना ने जब से भारत की सिनीयर टीम में एंट्री की तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने भारत के लिए आखिरी इंटरनेशनल मैच इसी साल फरवरी में भुवनेश्वर में एफआईएच प्रो लीग में खेला था। अपने लंबे करियर में वंदना ने कई बार भारत के लिए कमाल का प्रदर्शन किया है। बता दें, वंदना साल 2016 और 2023 में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में गोल्ड जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत को एफआईएच नेशंस कप 2022 में गोल्ड जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वंदना ने अपने संन्यास को लेकर कहा, "आज भारी, लेकिन कृतज्ञ मन से मैं अंतरराष्ट्रीय हॉकी से विदा ले रही हूं. यह फैसला सशक्त करने वाला और दुखी करने वाला दोनों है. मैं इसलिए नहीं हट रही हूं। यह फैसला सशक्त करने वाला और दुखी करने वाला दोनों है। मैं इसलिए नहीं हट रही हूं क्योंकि मेरे अंदर की आग मंद पड़ गई है या मेरे भीतर हॉकी नहीं बची है, बल्कि इसलिए क्योंकि मैं अपने करियर के शिखर पर संन्यास लेना चाहती हूं, जबकि मैं अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर हूं।
उन्होंने आगे कहा, "यह विदाई थकान की वजह से नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय मंच को अपनी शर्तों पर छोड़ने का एक विकल्प है, मेरा सिर ऊंचा रहेगा और मेरी स्टिक अभी भी आग उगल रही होगी। भीड़ की गर्जना, हर गोल का रोमांच और भारत की जर्सी पहनने का गर्व हमेशा मेरे मन में गूंजता रहेगा।"
इस दौरान अपने पिता के बारे में उन्होंने कहा, "मेरे दिवंगत पिता मेरी चट्टान, मेरे मार्गदर्शक थे. उनके बिना मेरा सपना कभी पूरा नहीं होता। उनके बलिदानों और प्यार से मेरे खेल की नींव पड़ी। उन्होंने मुझे सपने देखने, लड़ने और जीतने के लिए मंच दिया।"
Created On :   1 April 2025 10:16 PM IST