वक्फ संशोधित बिल 2025: वक्फ बिल में केंद्र की कोर्ट में चुनौती के बाद नीतीश -नायडू की शर्त के मायने कितने उचित?

- कोर्ट में चुनौती या संस्था पर छोड़ा जाए वक्फ ?
- पूजा स्थल अधिनियम और नए वक्फ को जोड़कर एक नई बहस हो सकती है शुरु
- केंद्र सरकार का वक्फ पर बड़ा बदलाव या विवाद
डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। वक्फ संशोधन बिल मे सबसे बड़ा बदलाव कोर्ट में चुनौती देना या किसी संस्था के अधिकारी को इस पर अंतिम फैसले लेने का अधिकार होगा। केंद्र की एनडीए सरकार ने नीतीश कुमार और नायडू की जो शर्त वक्फ संशोधन बिल में स्वीकार की गई है, आगामी समय में उनका होना या ना होना अधिक मायने रखाेगे। या फिर नीतीश कुमार और नायडू किसी छलकपट का शिकार होकर रह जाएंगे।
कानून नए तौर तरीके के रूप में दोनों सदन से जब भी सामने आएंगे तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती एनडीए सरकार की नाक बने नीतीश कुमार और नायडू की शर्त होगी। क्योंकि कानून को जब कोर्ट में चैलेंज करने की बात केंद्र सरकार प्रमुखता से कर रही है, जबकि नायडू की टीडीपी वक्फ संपत्ति विवाद के लिए कलेक्टर से ऊपर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी को अंतिम अधिकार देने की बात शर्त में प्रमुखता से कर रही है। ऐसे में अधिकारी को अंतिम अधिकार देने की बात एक तरह से पानी के बुलबुले की तरह होगी।
दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने नए कानून में शर्त रखी है कि अधिनियम के लागू होने से पहले मुसलमानों के धार्मिक पहचान से जुड़े स्थानों में छेड़छाड़ नहीं करेगी। मतलब अधिनियम लागू होने की पूर्व स्थिति बहाल रखेगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में लंबित पूजा स्थल अधिनियम और नया वक्फ अधिनियम को लेकर आगामी समय में कई सवाल सामने आएंगे।
आपको बता दें वक्फ कानून 1995 में सिविल अदालतों से ऊपर वक्फ न्यायाधिकरण को अधिकार दिए गए थे। वक्फ से संबंधित विवाद को वक्फ बोर्ड के सुलझाने को सर्वोपरि कहता है। वक्फ के फैसले को सिविल अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। 2013 के संशोधित कानून में सर्वे कमिश्नर की नियुक्ति , उसको लेखा जोखा रखने का अधिकार दिया। अब वक्फ में हो रहे बदलावों को आगामी वक्त , शर्त और संबंधित अधिकार ही बताएंगे।
Created On :   2 April 2025 6:48 PM IST