लोकसभा में वक्फ बिल पर चर्चा जारी: 'आज बालासाहेब जीवित होते तो क्या यही बोलते?..', यूबीटी सांसद अरविंद सावंत के बयान पर श्रीकांत शिंदे का पलटवार

आज बालासाहेब जीवित होते तो क्या यही बोलते?.., यूबीटी सांसद अरविंद सावंत के बयान पर श्रीकांत शिंदे का पलटवार
  • लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन बिल
  • सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दिखी तकरार
  • अरविंद सावंत ने इसे धार्मिक मामला बताया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज (बुधवार) को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में पेश किया। इस बिल को एनडीए सरकार में शामिल टीडीपी और जेडीयू ने अपना समर्थन दिया। बिल पर फिलहाल चर्चा हो रही है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बिल को लेकर जमकर तकरार हो रही है।

शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद अरविंद सावंत ने बिल पर चर्चा करते हुए कहा कि यह धार्मिक मामला है सरकारी नहीं। उन्होंने कहा, गैर मुस्लिम मेंबर वक्फ बोर्ड में ला रहे हो। डर लगता है कि मंदिरों के बोर्ड में गैर हिंदू को लाओगे। ऐसा किया तो हम इसका विरोध करेंगे। ये आगे चलकर क्रिश्चियन, सिख और जैन धर्म में भी हो सकता है। यह धार्मिक मामला है, यह सरकार का कैसे हो सकता है। 370 धारा खत्म की, हमने अभिनंदन किया। कश्मीर में जमीन कौन खरीद रहा है? मंदिरों की जमीनें हजारों एकड़ हैं, उनकी जमीन बेची जा रही है। क्या उसके खिलाफ भी कानून लाओगे। तब पता चलेगा कि सेकुलर कितने हो।

अरविंद सावंत के इस बयान पर पलटवार करते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का पूर्ण समर्थन करती है। इसके साथ ही उन्होंने अरविंद सावंत के भाषण को चौंकाने वाला बताया और कहा कि आज यह साफ हो गया कि उद्धव गुट किसकी विचारधारा को अपना रहा है।

उन्होंने कहा, "शिवसेना और मेरे नेता एकनाथ शिंदे की ओर से मैं इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करता हूं। यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन है। पहले अनुच्छेद 370, फिर ट्रिपल तलाक और CAA, और अब यह विधेयक गरीबों के कल्याण के लिए इस सदन में लाया गया है। उनका (UBT के अरविंद सावंत) भाषण सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। यह बहुत चौंकाने वाला था। मैं UBT से एक सवाल पूछना चाहता हूं, उन्हें अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए कि क्या वे आज बालासाहेब (ठाकरे) जीवित होते तो भी यही बोलते? आज यह स्पष्ट है कि UBT किसकी विचारधारा को अपना रही है और इस विधेयक का विरोध कर रही है। उनके पास अपनी गलतियों को सुधारने, अपने इतिहास को फिर से लिखने और अपनी विचारधारा को जीवित रखने का एक सुनहरा अवसर था। लेकिन UBT ने पहले ही उनकी विचारधारा को कुचल दिया। अगर बालासाहेब आज यहां होते और UBT का असहमति नोट पढ़ते, तो उन्हें बहुत दुख होता।"

Created On :   2 April 2025 5:41 PM IST

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