नारी शक्ति वंदन: महिलाओं को आरक्षण देने के दावों में कितना सच, जिन सीटों पर महिला मतदाता किंगमेकर वहां भी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं, ये है जमीनी हकीकत

महिलाओं को आरक्षण देने के दावों में कितना सच, जिन सीटों पर महिला मतदाता किंगमेकर वहां भी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं, ये है जमीनी हकीकत
  • एमपी चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लेकर सर्वे
  • 'द सूत्र' के सर्वे में आए चौंकाने वाले नतीजे

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी अब तक तीन लिस्ट जारी कर चुकी है। पार्टी अब तक 79 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है। बीजेपी ने इन 79 उम्मीदवारों में से 10 महिलाओं को टिकट दिया है। यानी 13 फीसदी महिलाओं को टिकट। हाल ही में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पास हुआ। बीजेपी नेता चुनावी सभाओं में इस बात का क्रेडिट लेने में जुटे हैं कि इतने वर्षों से महिला आरक्षण का मुद्दा अटका हुआ था और बीजेपी ने ही यह गारंटी पूरी की। बीजेपी ने भले ही 79 सीटों में से 10 सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया है, लेकिन बीजेपी ने उन सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतारा जहां वाकई में महिलाएं ही किंगमेकर हैं।

न्यूज पोर्टल द सूत्र ने महिला आरक्षण की चर्चा के बीच एक जमीनी रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें जो आंकड़ें हैं वे महिलाओं को पर्याप्त हक न देने की बात के साथ ये भी बताते हैं कि जिन विधानसभा सीटों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हैं वहां भी महिलाओं को टिकट नहीं मिल रहा है। सूत्र की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में महिला वोटरों की संख्या ढाई करोड़ से ज्यादा है और कुल वोटरों की संख्या के करीब करीब आधी संख्या महिला वोटर्स हैं। इसलिए हर राजनीतिक दल इस वर्ग को साधने में जुटा है।

शिवराज से लेकर कमलनाथ तक, राहुल से लेकर मोदी तक हर कोई महिलाओं के गुण गा रहे हैं। पॉलिटिकल पार्टियों की पोटली से लाड़ली बहना और नारी सम्मान योजना निकल रही है। सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है। वहीं कमलनाथ ने खजाना खोलने का वचन दे दिया है, लेकिन सवाल यह है कि जिन सीटों पर वाकई में महिलाएं किंगमेकर कही जाती हैं उन सीटों पर इन राजनीतिक दलों की नजरें इनायत क्यों नहीं होती? क्यों इन सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाता। क्या महिला आरक्षण और महिला को तवज्जो देने की बड़ी बड़ी बातें केवल कागजी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मप्र की 230 सीटों में से 23 सीटें ऐसी है जहां महिलाएं किंगमेकर हैं। क्योंकि इन सीटों पर महिला वोटर्स की संख्या पुरूषों के मुकाबले ज्यादा है। यानी इन सीटों पर महिलाओं का वोट ही तय करता है कि कौन बनेगा विधायक?

इन सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरूषों से ज्यादा

डिंडौरी, बिछिया, निवास, बैहर, बरघाट, पानसेमल, अलीराजपुर, झाबुआ,थांदला, पेटलावद, सरदारपुर, कुक्षी, सैलाना, बदनावर, मंडला, परसवाड़ा,बालाघाट,जोबट, वारासिवनी सीटों पर महिला वोटरों की संख्या पुरूषों से ज्यादा है।

चार सीटों पर महिला और पुरूष वोटर बराबर

विधनसभा सीट पुष्पराजगढ़, कटंगी, मनावर, रतलाम सिटी में महिला और पुरूष वोटरों की संख्या बराबर है।

जहां महिलाएं किंगमेकर, उन सीटों का हाल

मप्र में 23 सीटें ऐसी है जहां महिलाएं किंगमेकर हैं। इन 23 सीटों पर इस समय कांग्रेस का दबदबा है। इसमें से 16 सीटें कांग्रेस के खाते में हैं तो बीजेपी के पास केवल 6 सीटें हैं और एक सीट निर्दलीय के खाते में है।

जहां महिलाएं किंगमेकर, वहां महिलाओं को टिकट क्यों नहीं

अब सवाल यह है कि महिला मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बाद भी इन सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में क्यों नहीं उतारा जाता। दरअसल राजनीतिक दलों की तरफ से टिकट बांटते समय एक वाक्य सुनाई देता है विनीबिलीटी फैक्ट यानी जीताऊ चेहरा। सबसे अहम बात यह है कि इन 23 सीटों में से 17 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सीटें हैं। यानी एक तो आदिवासी और दूसरी महिला वोटर्स। इसके बाद भी राजनीतिक दलों ने कभी भी इन सीटों पर आदिवासी महिला नेतृत्व उभारने की कोशिश ही नहीं की। बीजेपी ने भले ही कहे कि उन्होंने आदिवासी वर्ग से आनी वाली महिला को देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद पर बैठाया है, लेकिन जिन आदिवासी सीटों पर महिलाएं निर्णायक है वहां कभी भी आदिवासी वर्ग से आने वाली महिला नेताओं को राजनीति के लिए तैयार ही नहीं किया और ऐसा ही कुछ कांग्रेस के साथ है। और तो और बीजेपी ने जो लिस्ट जारी की है उसमें इन 23 में से 12 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, लेकिन केवल दो महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है बाकी 10 सीटों पर पुरूषों को उम्मीदवार बनाया है।

डिंडौरी सीट का हाल

  • विधानसभा- डिंडौरी (एसटी)
  • पुरुष मतदाता- 1 लाख 20 हजार 362
  • महिला मतदाता- 1 लाख 21 हजार 86
  • अंतर- 724
  • मौजूदा विधायक-ओंकार मरकाम (कांग्रेस)
  • बीजेपी ने टिकट दिया- पंकज टेकाम

मंडला जिले की बिछिया सीट का हाल

  • विधानसभा- बिछिया (एसटी)
  • पुरूष मतदाता- 1 लाख 25 हजार 461
  • महिला मतदाता- 1 लाख 27 हजार 697
  • अंतर- 2236
  • विधायक-नारायण पट्टा ( कांग्रेस)
  • बीजेपी ने टिकट दिया- विजय आनंद मरावी

मंडला की निवास सीट का हाल

  • विधानसभा- निवास(एसटी)
  • पुरुष मतदाता-1 लाख 28 हजार 969
  • महिला मतदाता-1 लाख 32 हजार 1
  • अंतर-3032
  • विधायक-अशोक मर्सकोले(कांग्रेस)
  • बीजेपी ने टिकट दिया- फग्गन सिंह कुलस्ते

बालाघाट जिले की बैहर सीट का हाल

  • विधानसभा-बैहर
  • पुरुष मतदाता- 1 लाख 10 हजार 925
  • महिला मतदाता-1 लाख 14 हजार 823
  • अंतर-3998
  • विधायक-संजय उइके (कांग्रेस)
  • बीजेपी ने टिकट दिया- भगत सिंह नेताम को

यहां भी यही हाल

इसी तरह से बरघाट से कमल मस्कोले, पानसेमल से श्याम बर्डे, अलीराजपुर से नागर सिंह चौहान, झाबुआ से भानू भूरिया, थांदला से कल सिंह भाबर, कुक्षी से जयदीप पटेल को टिकट दिया है। केवल दो सीटें ऐसी है जहां महिलाएं महिला उम्मीदवार को चुनेंगी उसमेंपेटलावट और सैलाना सीट शामिल हैं। बीजेपी ने पेटलावद से निर्मला भूरिया को टिकट दिया है और रतलाम जिले की सैलाना सीट से संगीता चारेल को मैदान में उतारा है।

अभी भी है मौका

महिला आरक्षण बिल को लेकर ढिंढोरा पीटने वाले राजनीतिक दल चाहते तो महिला वोटर्स के दबदबे वाली इन सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर एक मिसाल कायम कर सकते थे। बीजेपी के पास 11 सीटों पर ऐसा करने का मौका अभी भी बचा हुआ है तो कांग्रेस के पास पूरी 23 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस के इन सीटों पर 16 मौजूदा विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस ऐसा कोई फैसला लेगी इसकी संभावना कम ही नजर आती है और बीजेपी भी सर्वे और विनीबिलिटी फैक्टर की आड़ में ऐसा करने से बच सकती है।

Created On :   29 Sept 2023 3:32 PM IST

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