राजनीति: झारखंड में कारखानों-फैक्ट्रियों में रात्रि पाली में भी काम कर सकेंगी महिलाएं, विधानसभा ने विधेयक पर लगाई मुहर

झारखंड में कारखानों-फैक्ट्रियों में रात्रि पाली में भी काम कर सकेंगी महिलाएं, विधानसभा ने विधेयक पर लगाई मुहर
झारखंड में महिलाएं अपनी इच्छा के अनुसार कारखानों, फैक्ट्रियों और संस्थानों में रात्रि पाली में भी काम कर सकेंगी। राज्य विधानसभा ने चालू बजट सत्र के 18वें दिन मंगलवार को इस प्रावधान से संबंधित बिल “कारखाना (झारखंड संशोधन) विधेयक, 2025” को स्वीकृति दे दी।

रांची, 25 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड में महिलाएं अपनी इच्छा के अनुसार कारखानों, फैक्ट्रियों और संस्थानों में रात्रि पाली में भी काम कर सकेंगी। राज्य विधानसभा ने चालू बजट सत्र के 18वें दिन मंगलवार को इस प्रावधान से संबंधित बिल “कारखाना (झारखंड संशोधन) विधेयक, 2025” को स्वीकृति दे दी।

राज्य सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने यह विधेयक मंगलवार को ही सदन में पेश किया था।

इसके पहले 18 फरवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी गई थी।

बताया गया है कि यह विधेयक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के तहत लाया गया है। विधेयक में प्रावधान किया गया है कि महिला श्रमिकों को उनकी सहमति से शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम पर रखा जा सकेगा।

इस दौरान सुरक्षा, अवकाश और कार्य घंटों से संबंधित सभी आवश्यक शर्तें लागू होंगी। नियोक्ताओं को राज्य सरकार की ओर से निर्धारित अन्य शर्तों का भी पालन करना होगा।

विधेयक की प्रस्तावना में कहा गया है कि इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में रोजगार के अवसरों और औद्योगिकीकरण की गति को तेज करना है। सरकार की ओर से उम्मीद जताई गई है कि इस संशोधन विधेयक से झारखंड में रोजगार और औद्योगिकीकरण में तेजी आएगी और कारखाना प्रबंधकों को अपने उत्पादन लक्ष्यों का निर्धारण कर इसे तय समय पर पूरा करने में सहूलियत होगी।

इसके साथ ही, यह संशोधन महिला और पुरुष कामगारों को समान अवसर प्रदान करने में भी सहायक होगा।

झारखंड विधानसभा में मंगलवार को झारखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पेश किया गया। सरकार की ओर से सदन को बताया गया है कि भारत सरकार द्वारा माल एवं सेवा कर में किए गए संशोधनों के अनुसार, राज्यों को भी अपनी नियमावली में संशोधन करना आवश्यक है।

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Created On :   25 March 2025 7:36 PM IST

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