राष्ट्रीय: अंसल ए.पी.आई. मामले में यूपी रेरा ने एनसीएलटी में दाखिल की याचिका, घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम

अंसल ए.पी.आई. मामले में यूपी रेरा ने एनसीएलटी में दाखिल की याचिका, घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने अंसल ए.पी.आई. के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) शुरू करने और मोरेटोरियम लागू करने के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। रेरा एनसीएलटी, दिल्ली में इम्प्लीडमेंट ऐप्लीकेशन दाखिल करेगा ताकि घर खरीदारों के हितों को नुकसान न पहुंचे।

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर, 10 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने अंसल ए.पी.आई. के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) शुरू करने और मोरेटोरियम लागू करने के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है। रेरा एनसीएलटी, दिल्ली में इम्प्लीडमेंट ऐप्लीकेशन दाखिल करेगा ताकि घर खरीदारों के हितों को नुकसान न पहुंचे।

रेरा ने अंसल ए.पी.आई. के खिलाफ जारी सभी वसूली प्रमाण-पत्रों (आरसी) और लंबित अनुपालन आदेशों की प्रतियां समाधान प्रक्रिया के लिए इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (आईआरपी) को भेज दी हैं। साथ ही, उन सभी आवंटियों को ई-मेल के माध्यम से सूचित किया गया है जिन्होंने रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित फॉर्म-सीए में आईआरपी के समक्ष अपना दावा शीघ्रता से प्रस्तुत करें।

यूपी रेरा के अनुसार, उसके आदेशों के चलते बड़ी संख्या में घर खरीदारों को उनके मकानों का कब्जा मिल रहा था और उनकी फंसी हुई धनराशि वापस हो रही थी। हालांकि, एनसीएलटी के आदेश के बाद रेरा अब सीधे होम बायर्स को राहत नहीं दे सकता। हजारों की संख्या में आवंटी अंसल ए.पी.आई. की लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर स्थित टाउनशिप परियोजनाओं में अपनी जिंदगी की जमापूंजी का निवेश कर चुके हैं और वर्षों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। रेरा में अंसल ए.पी.आई. से धनवापसी और मकानों के कब्जे को लेकर 2825 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से 708 आवंटियों को अब तक 125.39 करोड़ रुपये वापस दिलाए जा चुके हैं। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में आवंटियों को अपने घरों और भूखंडों का इंतजार है।

रेरा ने बताया कि अंसल ए.पी.आई. ने अब भी उसके 1234 आदेशों का अनुपालन नहीं किया है। कंपनी के खिलाफ 619 वसूली प्रमाण-पत्र लंबित हैं, जिनमें आवंटियों के लगभग 113 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसके अलावा, रेरा द्वारा लगाए गए 19.73 करोड़ रुपये के आर्थिक दंड से संबंधित 27 वसूली प्रमाण-पत्र भी लंबित हैं। हाल ही में रेरा ने अंसल के खिलाफ गैरकानूनी रूप से भूखंडों की बिक्री का मामला सामने आने पर 6 मामलों में 14 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था। इन सभी मामलों में वसूली प्रमाण-पत्र लखनऊ जिला प्रशासन को भेजे गए हैं ताकि अंसल से बकाया राशि वसूली जा सके।

रेरा ने आवंटियों को मिलने वाली धनराशि से जुड़े सभी वसूली प्रमाण-पत्र इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (आईआरपी) श्री नवनीत कुमार गुप्ता को सौंप दिए हैं। साथ ही, उन 219 आदेशों की प्रतियां भी भेजी गई हैं जिनके अनुपालन की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि अंसल ए.पी.आई. पहले भी अपनी परियोजनाओं को पूरा करने और रेरा के आदेशों का अनुपालन करने में टालमटोल करता रहा है।

उन्होंने कहा, "अंसल अपनी जिम्मेदारियों से बच न सके और निवेशकों के हित सुरक्षित रहें, इसलिए रेरा ने एनसीएलटी में इम्प्लीडमेंट ऐप्लीकेशन फाइल करने का निर्णय लिया है।" भूसरेड्डी ने बताया कि यह पहली बार है जब यूपी रेरा किसी मामले में एनसीएलटी में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि आवंटियों के हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि रेरा आईआरपी के माध्यम से वसूली प्रमाण-पत्रों के अनुसार धनराशि की अदायगी सुनिश्चित कराने का पूरा प्रयास करेगा। रेरा की इस कार्रवाई से अंसल ए.पी.आई. के हजारों आवंटियों को उम्मीद की किरण मिली है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनसीएलटी और आईआरपी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और घर खरीदारों को उनका हक कब तक मिलता है।

--आईएएनएस

पीकेटी/एएस

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Created On :   10 March 2025 8:04 AM

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