यूपी में दो मामलों में अदालत ने आरोपियों को किया बरी
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- संदेह का लाभ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। देश को झकझोर देने वाली घटनाओं के दशकों बाद दो मामलों में अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया। उत्तर प्रदेश के मेरठ में पहली घटना में, मलियाना हिंसा के लगभग 36 साल बाद, जिसमें 63 लोगों की जान चली गई थी, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने मामले में 39 अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश लखविंदर सूद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी 39 अभियुक्तों को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। 1987 में हुई हिंसा के बाद याकूब अली नामक व्यक्ति ने टी.पी. नगर थाने में 93 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। जुलाई 1988 में पुलिस ने 61 चश्मदीदों का जिक्र करते हुए 79 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
हालांकि, केवल 14 चश्मदीदों ने ही अपना बयान दर्ज कराया। मामले की सुनवाई 35 साल से भी ज्यादा समय तक चली। इस दौरान पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर समेत 40 आरोपियों की मौत हो गई। शेष 39 आरोपी शनिवार को कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने इन्हें बरी करने का आदेश दिया।
उधर, उत्तर प्रदेश के भदोही में हुई दूसरी घटना में चार लोगों के एनकाउंटर के 25 साल पुराने मामले में अदालत ने 34 पुलिसकर्मियों समेत 36 लोगों को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने इन लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (एडीजीसी), विकास नारायण सिंह ने कहा अक्टूबर 1998 में पुलिस ने दावा किया था कि 50 हजार के इनामी अपराधी धनंजय सिंह सहित चार लोगों को सरेई पेट्रोल पंप पर डकैती के दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। धनंजय सिंह अब जनता दल (यूनाइटेड) के नेता और पूर्व सांसद हैं।
समाजवादी पार्टी (सपा) के दिवंगत नेताओं अमर सिंह और फूलन देवी, सपा के पूर्व नेता अहमद हसन और भदोही के सपा विधायक जाहिद बेग ने इस घटना को लेकर आंदोलन किया और आरोप लगाया कि मुठभेड़ फर्जी थी।
सरकार ने बाद में सीबी-सीआईडी जांच का आदेश दिया, इससे पता चला कि मुठभेड़ सुनियोजित थी। सीबी-सीआईडी ने तत्कालीन सर्कल अधिकारी अखिलानंद मिश्रा सहित 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन सभी को बाद में जमानत दे दी गई।
एडीजीसी ने कहा कि सीबी-सीआईडी जांच से पता चला है कि जौनपुर में सरल ऑफिसर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मिश्रा की एक छात्र नेता के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी थी, जो धनंजय सिंह का हमशक्ल था। भदोही तबादला होने के बाद मिश्रा इस व्यक्ति को जौनपुर से लाकर फ्लैट में रख लिया।
सरकारी वकील ने कहा कि अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखते हुए मिश्रा ने सरोई में दिनदहाड़े चार लोगों की हत्या कर दी। इस बीच, एडीजीसी ने कहा कि धनंजय सिंह ने फरवरी 1999 में एक अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों घटनाओं ने उस समय राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं।
आईएएनएस
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Created On :   3 April 2023 9:00 AM IST