तीन महीने बाद कोरोना की तीसरी लहर: बीएचयू प्रोफेसर ने कहा- कोविड की तीसरी लहर कम घातक होगी

September 13th, 2021

हाईलाइट

  • कोरोनावायरस की तीसरी लहर कम घातक होगी
  • कोरोना की तीसरी लहर तीन महीनों के बाद आ सकती है
  • जिन लोगों को टीका लग चुका है वो प्रोटेक्टेड ग्रुप के अंतर्गत आएंगे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के एजेनेटिकिस्ट प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि कोरोनावायरस की तीसरी लहर कम घातक होगी। चौबे ने कहा कि जिन लोगों को कोविड-19 का टीका लग चुका है और जो लोग वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं वे तीसरी लहर के दौरान प्रोटेक्टेड ग्रुप के अंतर्गत आएंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर तीन महीनों के बाद आ सकती है। 

इंडिया टुडे से बातचीत में चौबे ने कहा कि वायरस को रोका नहीं जा सकता, लेकिन मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा, समय-समय पर, कोरोना पीक पर होगा, लेकिन यह अंततः कम हो जाएगा। एंटीबॉडी का स्तर कम हो जाने पर, कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाएगी। फिर भी, प्रोटेक्टेड ग्रुप के लोगों के लिए, मृत्यु दर बहुत कम है। उन्होंने कहा, 'अगर हमारी पूरी आबादी भी कोरोना से संक्रमित हो जाती है और मृत्यु दर 0.1 या 1 फीसदी से भी नीचे रहती है तो हम यह जंग जीत जाएंगे।'

बच्चों के टीकाकरण के बारे में बात करते हुए, चौबे ने कहा कि अगले तीन से चार महीनों में ज़ायडस कैडिला वैक्सीन बाजार में आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली दोनों लहरों के दौरान वयस्कों की तुलना में बच्चे वायरस से कम प्रभावित हुए हैं। उत्तर-पूर्व और केरल में मामले बढ़ने की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रोजाना सिर्फ 10 से 20 मामले ही दर्ज हो रहे हैं, जिसे एक अच्छे संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

चौबे ने कहा, 'केरल में केवल 40 प्रतिशत लोगों में सेरोपोसिटिविटी विकसित हुई है। जबकि यूपी में, 70 प्रतिशत लोगों में सेरोपोसिटिविटी विकसित हुई थी। एक महीने के बाद, केरल में मामले कम होने लगेंगे, जैसे कि यूपी में हुए।'

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