महाकाल के दर्शन में निकली पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के आंसू पीएम को किया ट्वीट
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डिजिटल डेस्क, उज्जैन। माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकीं विश्व की पहली दिव्यांग अरुणिमा सिन्हा मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आई थीं। जहां अरुणिमा सिन्हा को महाकाल के दर्शन करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। जिस पर उन्होंने अपनी नाराजगी ट्विटर पर जाहिर की। अरुणिमा सिन्हा ने लिखा कि "मुझे एवरेस्ट पर चढ़ने में इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा जितनी महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन मंदिर में करना पड़ा।
उन्होंने कहा, इस मंदिर के सुरक्षा कर्मचारियों एवं मंदिर प्रशासन ने मेरी दिव्यंगता का मज़ाक बनाया। अरुणिमा सिन्हा ने पीएम नरेन्द्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट किया और लिखा कि "आपको ये बताते हुए बहुत दु:ख है कि मुझको एवरेस्ट चढ़ने में इतनी दिक्कत नहीं हुई, जितनी महाकाल मंदिर उज्जैन में हुई। वहां मेरी दिव्यंगता का मजाक बना।"
मुझे आपको ये बताते हुए बहुत दुःख है की मुझे Everest जाने में इतना दुःख नहीं हुआ जीतना मुझे महाकाल मंदिर उज्जैन में हुआ वहाँ मेरी दिव्यंगता का मज़ाक़ बना । @PMOIndia @CMMadhyaPradesh
— Arunima Sinha (@sinha_arunima) December 25, 2017
बता दें कि सुबह साढ़े तीन से चार बजे के बीच अरुणिमा अपनी दो सहयोगी महिलाओं के साथ महाकाल मंदिर में होने वाली भस्मारती में शामिल होने आई थीं। मंदिर के सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों ने उसे उसकी दो सहयोगी महिलाओं के साथ गर्भगृह में जाने से दो बार रोक दिया। अरुणिमा की उनसे लंबे समय तक बहस भी हुई। हालांकि, अरुणिमा ने बाद में मंदिर के दर्शन किए। इस घटना के बाद जब वह महाकाल मंदिर के बाहर आईं तो वह रो पड़ी।
भस्मारती को एलसीडी में देखने के लिए कहा
अरुणिमा सिन्हा ने बताया कि मंदिर के कर्मचारियों ने उन्हें भस्मारती को एलसीडी में देखने के लिए कहा। बाद में मुझको कहा कि खुद गर्भगृह में चले जाओ, मैं खुद नहीं जा सकती थी, इसलिए दोनों सहयोगियों को साथ ले जाने के आग्रह कर रही थी। जब अरुणिमा वहां पहुंची और मंदिर के अंदर जाने लगीं तो मंदिर के कर्मचारियों ने उन्हें यह कह कर रोक दिया कि वो लोअर, टी-शर्ट और जैकेट पहन कर मंदिर के अंदर नहीं जा सकतीं। अरुणिमा ने कहा कि मंदिर के अंदर जाने के लिए किसी ड्रेस कोड को बारे में कुछ भी लिखा हुआ नहीं दिखा। अरुणिमा ने सारी बात वहां मंदिर कर्मियों को समझाने की कोशिश भी की, लेकन मंदिर प्रशासन के कर्मचारी उन्हें धक्का देने से भी नहीं चूके।
मंदिर प्रशासक ने दी सफाई
महाकाल मंदिर प्रशासक अवधेश शर्मा ने बताया कि इस घटना का हमें मीडिया में आई रिपोर्ट से पता चला है। इस संबंध में अरुणिमा सिन्हा ने न तो पुलिस में और न ही मंदिर प्रशासन में शिकायत दर्ज की है। शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि मंदिर में दर्शन के लिए विकलांगों के लिए रैंप बना हुआ है। जिन-जिन लोगों के पास अनुमति रहती है, उन्हें मंदिर में अंदर जाने दिया जाता है। जिन-जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अरुणिमा को रोका है, उनसे पूछताछ की जाएगी कि उन्हें क्यों रोका गया।
मंदिर प्रशासक अवधेश शर्मा ने कहा कि "हम सीसीटीवी के फुटेज भी देख रहे हैं, ताकि पता चले कि पुलिस एवं हमारे कार्यकर्ताओं से चूक कहां हुई। अगर इस मामले में अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को अरुणिमा सिन्हा का ट्वीट सामने आने के बाद प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हर मंदिर और हर पूजा की अपनी परंपरा और मर्यादा है, उसका पालन करना चाहिए।
घटना पर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दुख जताया है, उन्होंने ट्वीट पर लिखा है कि उनको इस पर बेहद अफसोस है। इस घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं, आप देश का गौरव हैं, भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में आपका स्वागत है।
@sinha_arunima जी आपके साथ महाकाल मंदिर में हुए व्यवहार के बारे में जानकर अफसोस हुआ।जिला प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की जाँच के निर्देश दे दिए गए हैं।मप्र सरकार दिव्यांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।आप देश का गौरव हैं, भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में आपका स्वागत है। https://t.co/DQw2Z8wkgz
— Bhupendra Singh (@bhupendrasingho) December 25, 2017
अरुणिमा सिन्हा के साथ हुए इस व्यवहार पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा- "अरुणिमा देश की बेटी हैं, मेरी मेहमान थी, हमें उन पर गर्व है। इस मामले में महाकाल मंदिर प्रशासन से बात करूंगी। उन्हें दोबारा इनवाइट करने लखनऊ भी जाऊंगी।
राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकीं अरुणिमा
बता दें कि अरुणिमा सिन्हा राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुकीं है। अप्रैल, 2011 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया था। जिसमें उन्होंने घुटने के नीचे से अपना एक पैर गवां दिया। इसके ठीक दो साल बाद उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और और देश की पहली दिव्यांग पर्वतारोही बन गईं।
Created On :   26 Dec 2017 10:02 AM IST