56 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा, मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ा : सर्वे
- 21.6% उत्तरदाताओं ने कहा कि भेदभाव कुछ हद तक बढ़ गया है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आईएएनएस-सीवोटर स्नैप पोल के अनुसार पिछले कई वर्षो में 56 फीसदी से अधिक लोगों ने महसूस किया कि मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ा है। जबकि 43.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने दावा किया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव नहीं बढ़ा, 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बहुत बढ़ गया है।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 30वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, 5 दिसंबर, 2021 को 1942 के एक सैंपल का उपयोग कर सर्वेक्षण किया गया। प्रभावी रूप से, 56 प्रति से अधिक लोगों ने महसूस किया कि मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बढ़ गया है, जबकि 21.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि भेदभाव कुछ हद तक बढ़ गया है।
एनडीए समर्थकों और विपक्षी दलों के बीच की खाई प्रतिक्रियाओं में स्पष्ट रूप दिख रही है। एनडीए के केवल 20 प्रतिशत समर्थकों ने महसूस किया कि भेदभाव बहुत बढ़ गया है, वहीं 45.6 प्रतिशत विपक्षी मतदाताओं ने ऐसा व्यक्त किया।
इसी तरह, जहां एनडीए के 58 प्रतिशत समर्थकों ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के शासन में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव में कोई वृद्धि नहीं हुई, वहीं 33 प्रतिशत विपक्षी मतदाताओं का भी यही मत था। हाल के दिनों में, भारत के साथ-साथ विदेशों में उदारवादियों, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार निकायों ने वर्तमान सरकार पर अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
(आईएएनएस)
Created On :   6 Dec 2021 4:30 PM IST