Sheetala Saptami 2025: कब है शीतला सप्तमी? जानिए पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

- मां का ये रूप काफी सरस और मोहक है
- विशेष पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है
- व्रत रखने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में शीतला सप्तमी (Sheetala Saptami) का बड़ा महत्व बताया गया है, जो कि हर महीने की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को आती है। यह शीतलता और स्वास्थ्य की देवी माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित है। मां शीतला को मां दुर्गा का ही अवतार माना जाता है। मां का ये रूप काफी सरस और मोहक है। माना जाता है कि शीतला सप्तमी पर शीतला मां की विशेष पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलने के साथ और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। चैत्र महीने में शीतला सप्तमी का व्रत 21 मार्च को है।
स्कंद पुराण के अनुसार, माता शीतला रोगों से बचाने वाली देवी हैं। माता शीतला अपने हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते धारण किए हुए रहती हैं और गधे की सवारी करती हैं। ऐसे में शीतला सप्तमी के दिन जातक व्रत रखने के साथ ही मां की आराधना करते हैं। इस दिन परिवार का कोई भी सदस्य गरम भोजन ग्रहण नहीं करते हैं।
तिथि कब से कब तक
सप्तमी तिथि आरंभ: 21 मार्च 2025, शुक्रवार सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर
सप्तमी तिथि समापन: 22 मार्च 2025, शनिवार की सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर
पूजन मुहूर्त: 21 मार्च की सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शाम 6 बजकर 33 मिनट तक
पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नित्यक्रिया आदि से निवृत्त होकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- इसके बाद पूजा की थाली में दही, रोटी, बाजरा, सप्त्मी को बने मीठे चावल, नमक पार और मठरी रखें।
- इसके अलावा दूसरी थाली में आटे से बना दीपक, रोली, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, मोली, सिक्के और मेहंदी रखें। साथ ही लोटे में ठंडा पानी रखें।
- शीतला माता की पूजा करें और दीपक को बिना जलाए ही मंदिर में रखें।
- पूजा के दौरान मेहंदी और कलावा सहित सभी सामग्री माता को अर्पित करें।
- अंत में जल चढ़ाएं और थोड़ा जल बचाएं। इसे घर के सभी सदय आंखों पर लगाएं और थोड़ा जल घर के हर हिस्से में छिड़कें।
- अगर पूजन सामग्री बच जाए तो ब्राम्हण को दान करें।
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Created On :   20 March 2025 7:00 PM IST