Eknath shashti 2025: जानिए कौन हैं संत एकनाथ और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

जानिए कौन हैं संत एकनाथ और क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
एकनाथ जी महाराज एकनिष्ठ गुरुभक्त थे, मराठी साहित्य में उनका महत्वपूर्ण योगदान है, इस वर्ष एकनाथ षष्ठी 20 मार्च गुरुवार को है

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को एकनाथ षष्ठी (Eknath shashti) के रूप में मनाया जाता है। यह एक​ महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जिसे संत एकनाथ महाराज की पुण्य तिथि के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि, वि.सं 1590 ईस्वी सन् 1533 में इस तिथि को संत एकनाथजी का जन्म हुआ था। एकनाथजी महाराज एकनिष्ठ गुरुभक्त थे। मराठी साहित्य और भक्ति आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस वर्ष एकनाथ षष्ठी 20 मार्च 2025, गुरुवार के दिन मनाई जा रही है। आइए जानते हैं संत एकनाथ के जीवन के बारे में...

संत एकनाथ का जीवन

संत एकनाथ महाराज का जन्म एक प्रतिष्ठित ब्राम्हण परिवार में हुआ था। उनके जन्म के कुछ समय बाद ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया उनके दादा श्रीचक्रपाणिजी ने उनका पालन-पोषण किया। एकनाथजी बाल्यकाल से ही बड़े बुद्धिमान और श्रद्धावान थे। संध्या, हरि-भजन, पुराण-श्रवण, ईश्वर-पूजन आदि में उनकी बड़ी प्रीति थी। आनन्दमग्न होकर कभी-कभी हाथ में करताल लेकर अथवा कन्धे पर करछुल या ऐसी ही कोई चीज वीणा की भांति रखकर वे भजन करते। कोई भी पत्थर सामने रखकर उस पर फूल चढाते तो कभी भगवन्नाम-संकीर्तन करते हुए नृत्य करते। जब गाँव में श्रीमदभागवत कथा होती तब पूरी तन्मयता के साथ सुना करते थे। इतनी छोटी आयु में भी वे त्रिकाल संध्या-वन्दन करना कभी भूलते नहीं थे।

स्तोत्र-पाठ, प्रातः-सायं भगवान एवं गुरुजनों का वन्दन आदि नियम-निष्ठा में भी वे तत्पर रहते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि भगवत्प्रेम के रस से सराबोर उनके जीवन में भगवान के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान की जिज्ञासा पैदा हुई। उनके बाल मन में बार-बार यह विचार आने लगा कि ‘जैसे ध्रुव और प्रह्लाद को भगवान की प्राप्ति कराने वाले सद्गुरु नारदजी मिले, वैसे समर्थ सद्गुरु मुझे कब मिलेंगे?

एक दिन 12 वर्षीय एकनाथ शिवालय में हरिगुण गाते हुए बैठे थे और रात्रि का चौथा पहर शुरू होने पर उनके हृदय में आकाशवाणी हुई कि ‘देवगढ़ में जनार्दन पंत नामक एक सत्पुरुष रहते हैं। उनके पास जाओ वे तुम्हें कृतार्थ करेंगे। एकनाथ देवगढ़ गये, वहाँ उन्हें श्री जनार्दन पंत के दर्शन हुए। गद्गद् होकर एकनाथजी ने अपने आपको गुरुचरणों में अर्पण किया।

तब से गुरुद्वार पर रहकर एकनाथजी गुरुसेवा में लग गये। गुरु सोकर उठें इससे पहले वे जाग जाते। जो सेवा सामने दिख जाती उसे बिना आज्ञा के कर डालते। रात को गुरुजी के चरण दबाते, कभी पंखा झलते। गुरुजी जब समाधि लगाते तब वे द्वार पर खड़े रहते। गुरुदेव की समाधि में किसी प्रकार का अवरोध न हो इसका ध्यान रखते।

गुरु जी के पास और भी कई सेवक थे पर एकनाथजी किसी की प्रतीक्षा नही करते वे स्वयं ही बड़े प्रेम, उत्साह व तत्परता से सेवाकार्यों में लगे रहते। उनके लिए गुरुजी का संतोष ही स्वसंतोष था, गुरुजी के शब्द ही शास्त्र थे, गुरुद्वार ही नंदनवन था तथा गुरुजी की मूर्ति ही परमेश्वर-विग्रह था। गुरुर्साक्षात् परब्रह्म में उनकी दृढ़ निष्ठा थी। लगातार छः वर्षों तक सेवा से प्रसन्न होकर एक दिन गुरुजी ने उन्हें अनुष्ठान करने की आज्ञा दी। उसे शिरोधार्य कर एकनाथजी अनुष्ठान में लग गए।

एक दिन एकनाथ जी समाधि लगाये हुए थे। तभी एक भयंकर काला सर्प लहराता हुआ उनके शारीर पर लिपट गया। एकनाथजी की छाया से वह हिंसक भाव भूल गया व उनके मस्तक पर फन फैलाकर झूमने लगा। वह सर्प फिर एकनाथजी का संगी ही बन गया। वह नित्य एकनाथजी के पास आने लगा। जब वे समाधि लगाते तब वह उनके शरीर से लिपटकर मस्तक पर फन फैलाकर झूमने लगता तथा उनकी समाधि से जागते ही चला जाता।

किन्तु एकनाथजी को इसका कोई ज्ञान ही नही था। एकनाथजी के लिए दूध लेकर आने वाले किसान ने एक दिन एकनाथजी से लिपटे साँप को देख लिया और चीख पड़ा। तभी एकनाथजी कीी समाधि टूट गई और तब वे उठे तथा साँप को भी जाते हुए देखा। अनुष्ठान पूरा करके सब हाल गुरु को कह सुनाया। तब खूब प्रसन्न होकर गुरुजी ने उन पर आशीर्वाद के पुष्प बरसाये। उन्हें यह समझते देर न लगी कि अब मेरा एका निद्र्वन्द्व नारायण में पूर्णतया प्रतिष्ठित हो चुका है। इसके बाद एकनाथजी ‘एकनाथजी महाराज के रूप में पूजित हुए। उन्होंने ‘एकनाथी भागवत जैसे ग्रंथ द्वारा समाज में परमात्म-रस की धारा प्रवाहित की।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग- अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।

Created On :   19 March 2025 10:00 PM IST

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