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Shahdol News: अवैध कोयला खदानों को लेकर एक्शन मोड में प्रशासन

- उमरिया व अनूपपुर की सीमा पर स्थित खदानों को बंद कराया लेकिन लोढ़ी तथा खुडऱी में अब भी डेंजर होल से निकाला जा रहा कोयला
- राजस्व, पुलिस तथा खनिज विभाग के संयुक्त दल द्वारा मिट्टी, रेत व पत्थर आदि डालकर 12 अवैध खदानों को बंद कराया गया।
- शहडोल के चुनिया गड़ई (धनगवां) में प्रशासन व्यापक पैमाने पर कार्रवाई कर दो दर्जन से अधिक खदानों को बंद करा चुका है
Shahdol News: धनगवां (शहडोल) के चुनिया गड़ई में बीते रविवार अवैध कोयला खदान धंसकने से हुई मजदूर दंपति की मौत के बाद शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिले का प्रशासन क्शन मोड में है। उमरिया-शहडोल जिले की सीमा पर स्थित ओदरी गांव में चल रही एक दर्जन से अधिक अवैध कोयला खदानों के बारे में उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन से सवाल पूछने के चंद घंटे बाद ही शनिवार दोपहर 4 जेसीबी मशीनों के साथ पूरा अमला मुरना नदी के तट पर जा पहुंचा।
राजस्व, पुलिस तथा खनिज विभाग के संयुक्त दल द्वारा मिट्टी, रेत व पत्थर आदि डालकर 12 अवैध खदानों को बंद कराया गया। इन खदानों से हर दिन करीब 2 लाख रुपए कीमत का 50 टन कोयला, शहडोल के भाई जान के लिए निकाला जाता रहा है। इसी तरह से अनूपपुर-शहडोल जिले की सीमा पर स्थित बकही में संचालित 4 अवैध कोयला खदानों को बंद कराया गया।
इससे पहले शहडोल के चुनिया गड़ई (धनगवां) में प्रशासन व्यापक पैमाने पर कार्रवाई कर दो दर्जन से अधिक खदानों को बंद करा चुका है और भटुरा में अमलाई पुलिस ने फौरी कार्रवाई की थी। बावजूद इसके कोयले का अवैध उत्खनन हो रहा है और तीनों जिलों के ईंट-भट्टों में खप रहा है। कारण, अवैध कोयला खदानों तथा ईट भट्टों को रसूखदारों का संरक्षण और इनका पड़ोसी राज्य तक फैला तगड़ा नेटवर्क होना है।
बड़ी बात यह कि शहडोल संभाग के तीनों जिलों में चल रहे हजार से अधिक वैध-अवैध ईंट भट्टों के लिए जरूरी कोयले व लकड़ी की आपूर्ति कहां से होती है, यह जानने की जहमत शहडोल, अनूपपुर तथा उमरिया जिले के प्रशासन ने नहीं उठाई।
अनूपपुर में शहडोल से बुरी स्थिति
अनूपपुर जिले में शहडोल के भटुरा, चंगेरा तथा पटासी से भी बुरी स्थिति है। वहां प्रशासन ने शहडोल जिला सीमा से सटे बकही में तो कार्रवाई की लेकिन कोयले की अवैध खदानों के गढ़ माने जाने वाले कोतमा से लगे लोढ़ी गांव तथा जर्राटोला के खोड़ऱी में 40 से अधिक गहरी सुरंगे हैं। इन अवैध खदानों से हर दिन करीब 100 टन कोयला निकाला जाता है और केवई नदी के किनारे स्थिति ईंट भट्टों सहित अन्यत्र खपा दिया जाता है।
अकेले केवई नदी के एक किलोमीटर के हिस्से में ही करीब सौ ईंट भट्टे हैं। कोयले के काले कारोबार से जुड़े जानकारों के मुताबिक इन ईंट भट्टों में हसदेव क्षेत्र के राजनगर में आमाडांड ओसीएम, बरतराई की एसईसीएल की कोयला खदानों का भी कोयला चोरी-चुपके पहुंचता है। एसईसीएल के अफसर इससे इंकार करते हैं लेकिन राजनगर आमाडांड बरतराई ओसीएम से कोयला चोरी करते समय हुई दुर्घटनाएं और उनमें हुई मौतें इसका प्रमाण हैं। शहडोल आईजी अनुराग शर्मा कहते हैं कि जहां कहीं भी यदि सुरंगों को पूरी तरह से नहीं भरा जा रहा है तो मैं संबंधित को बताता हूं। अनूपपुर और उमरिया में रविवार को भी कार्रवाई होगी। आगे भी ऐसे सभी सुरंगों को भरने की कार्रवाई की जाएगी।
पूरे संभाग में फ्री सेल का कोयला नहीं
समूचे शहडोल संभाग में एक भी कोयले की फ्री सेल की दुकान नहीं है। चूंकि अनूपपुर, शहडोल व उमरिया में एसईसीएल की ओपन कास्ट और अंडर ग्राउंड कोल माइंस का इस तरह जाल फैला है कि किसी को भी कोयला बेचने की अनुमति नहीं मिल पाती। बावजूद इसके संभाग में एक हजार से अधिक ईंट भट्टे तो धधक ही रहे हैं, उद्योगों में भी कोयले का उपयोग हो रहा है। सूचीबद्ध उद्योगों को एसईसीएल की खदानों से फ्री सेल के कोयले की उपलब्धता की सरकारी व्यवस्था है लेकिन ईंट भट्टे सहित शेष के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
Created On :   24 Feb 2025 2:07 PM IST