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Pune News: औरंगजेब की कब्र के बाद अब वाघ्या कुत्ते की समाधि की चर्चा गर्म

- अहिल्याबाई होलकर के वशंज भूषणसिंह होलकर ने सरकार से समिति गठित करने की मांग की
- औरंगजेब की कब्र के बाद अब वाघ्या कुत्ते की समाधि की चर्चा गर्म
Pune News. औरंगजेब की कब्र को लेकर राज्य में विवाद चल रहा है। अब छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि स्थल रायगढ़ पर स्थित वाघ्या कुत्ते की समाधि का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। इतिहास में वाघ्या कुत्ते का कोई संदर्भ नहीं है, इसलिए उस समाधि को वहां से हटा दिया जाए, ऐसी मांग पूर्व सांसद संभाजीराजे ने की है। संभाजी ब्रिगेड ने भी 1 मई तक वाघ्या कुत्ते की समाधि हटाएं, अन्यथा संगठन खुद हटाएगा, ऐसी चेतावनी दी है। अहिल्याबाई होलकर के वशंज भूषणसिंह राजे होलकर ने कहा कि औरंगजेब की कब्र के बाद अब वाघ्या कुत्ते का विषय सामने आया है। ऐतिहासिक विषय जाति-संबंधी विषय नहीं होते, बल्कि तत्कालीन परिस्थितियों पर आधारित होते हैं। कई संगठन और लोग इसकी चर्चा कर रहे हैं। इसको लेकर सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पहल करनी चाहिए तथा इतिहासकारों और अन्य लोगों वाली एक समिति गठित करनी चाहिए। जो भी तथ्य इसमें सामने आएगा उसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। इसमें किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए, ऐसा होलकर ने कहा।
कुछ लोग भावनाओं का अनादर कर रहे हैं
वाघ्या कुत्ते की समाधि के मुद्दे पर होलकर परिवार के वशंज भूषणसिंह राजे होलकर ने गुरुवार को प्रेस कॅन्फ्रेंनस की। भूषण सिंह ने कहा कि मैं इस विषय पर बात नहीं करना चाहता था। सामाजिक विभाजन न पैदा हो इसलिए इसपर चर्चा कर रहा हूं। इस स्मारक से कई लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए समिति से जांच करवानी चाहिए, इसमें राजनीतिक व्यक्ति को शामिल नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दोनों पक्षों को समझना चाहिए और समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्रपति परिवार का होलकर से संबंध रहा है, होलकर परिवार ने शिव समाधि के लिए धन उपलब्ध कराया था, इसलिए हमारे समाज की भावनाएं भी उस स्मारक से जुड़ी हुई हैं। शिवस्मारक के जीर्णोद्धार के लिए होलकर परिवार ने फंड दिया था। कुछ लोग उस भावना का अनादर करते हुए उसके खिलाफ बयानबाजी करते हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
होलकर ने कभी अंग्रेजों से संधि नहीं की
हाल ही में एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि होलकर अंग्रेजों से डरते थे। इसपर भूषण सिंह ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह कथन पूरी तरह से गलत है। जिसने भी यह बयान दिया है, उससे पूछा जाना चाहिए कि उसने कितना इतिहास पढ़ा है? होलकर ने कहा कि अगर भारत में किसी ने अंग्रेजों के खिलाफ आखिरी लड़ाई लड़ी थी तो वे महाराजा यशवंतराव होलकर थे। 1818 में यशवंतराव होलकर की मृत्यु के बाद भी मल्हारराव होलकर द्वितीय 19 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के मैदान में लड़ रहे थे। उस युद्ध में रानी तुलसाबाई की मृत्यु हो गई। होलकरों ने कभी भी अंग्रेजों के साथ समझौता कर संधि नहीं की।
Created On :   27 March 2025 8:48 PM IST