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टेंबे गणराज के चरणों में अर्पण करें पेन -कॉपी -किताबें, बप्पा करेंगे जरूरतमंद बच्चों की मदद
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डिजिटल डेस्क, बीड, सुनिल चौरे पुजारी। जिले के माजलगांव में 122 साल की अनूठी पंरपरा आज भी जारी है। यहां मंगलवार को निजाम काल के टेंबे गणराज की ईको फ्रेंडली मूर्ती की स्थापना मंगलवार की गई। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष अं
आयोजन के दौरान पर्यावरण प्रेमी और भक्तों में खासा उत्साह देखा गया है। माना जाता है कि भक्तों की मुराद टेंबे भगवान गणराज की आराधना भर से पूरी हो जाती है। इसलिए इसे मन्नत पूरी करनेवाले टेंबें भगवान गणराज भी कहते हैं।
122 साल पहले टेंबे गणराज की शोभायात्रा को लेकर निजाम से अनुमती मांगी गई थी। तब भक्त घोड़े पर सवार होकर हैदराबाद से पंजीकरण कर अनुमती लाए थे। तब से भाद्रपद एकादशी के दिन टेंबे गणराज की स्थापना की जाती है। भक्त उसी परंपरा को कायम रखते हुए हर साल बप्पा की स्थापना करते हैं। भगवान टेंबे गणराज के दर्शन के लिए महाराष्ट्र सहित देशभर से भक्त यहां आते हैं।
इसलिए गणराज को टेंबे कहा जाता है
साल 1901 में गणराज की शोभायात्रा के समय बिजली की सुविधा नहीं थी। शोभायात्रा के समय अंधेरा रहता था, ऐसे में रौशनी के लिए भक्त मशाल का इस्तेमाल करते थे। लकड़ी पर कपड़ा लिपटाकर उसपर तेल डाला जाता था। फिर आग लगा टेंबा किया जाता था। तब से टेंबे गणराज कहते हैं।
Created On :   6 Sept 2022 6:52 PM IST