गावस्कर क्रिकेट फाउंडेशन : अब बैडमिंटन, फुटबॉल और टेबल टेनिस खेल की अनुमति 

September 15th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश सरकार ने मशहूर क्रिकेटर सुनील गावस्कर को बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स (बीकेसी) में आवंटित म्हाडा के भूखंड पर अब बैडमिंटन, फुटबॉल और टेबल टेनिस के खेल को अनुमति दी है। बुधवार को राज्य के गृहनिर्माण विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। सरकार ने गावस्कर को बीकेसी में आवंटित म्हाडा के मालिकाना हक वाला दो हजार वर्गमीटर के भूखंड क्षेत्र में बैडमिंटन, फुटबॉल और टेबल टेनिस खेल की सुविधा उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। फिलहाल इस भूखंड पर इंडोर क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्र मौजूद है। सरकार ने सुनील गावस्कर क्रिकेट फाउंडेशन के 27 जनवरी 2021 को दिए पत्र के अनुसार यह भूखंड पर नए गतिविधियों के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इस भूखंड पर स्पोर्ट्स मेडिसिन सेंटर के निर्माण की अनुमति दी गई है। इससे यहां के खेल प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षणार्थियों और खिलाड़ियों को चोट लगने पर उनका उपचार हो सकेगा। इसके अलावा इस भूखंड पर विशेषज्ञ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के व्याख्यान के आयोजन के लिए ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। इससे ऑडिटोरियम में खेल प्रशिक्षण केंद्र में सहभागी विभिन्न प्रकार के खिलाड़ियों को मार्गदर्शन मिल सकेगा। सरकार ने सुनील गावस्कर क्रिकेट फाउंडेशन के खेल प्रशिक्षण केंद्र को इंडोर क्रिकेट प्रशिक्षण स्टेडियम के बजाय अब मल्टी फैसिलिटीज स्पोर्ट्स सेंटर विथ इंडोर व आउटडोर फैसिलिटीज नाम देने को मान्यता दी है। इसके पहले सरकार ने साल 1988 गावस्कर को इंडोर क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्र के लिए भूखंड उपलब्ध कराया था। फिर बाद में सरकार ने साल 2002 में भूखंड पर हेल्थ क्लब, फिटनेस सेंटर, जिम्नेजियम, स्विमिंग पुल, स्वकैश खेल, प्रशिक्षणार्थियों को रहने की व्यवस्था और स्पोर्ट्स कैफेटेरिया शुरू करने की मंजूरी दी थी। 

औरंगाबाद के पैठण संतपीठ में जल्द शुरू होगा कोर्स 

औरंगाबाद के पैठण स्थित संतपीठ में भारतीय परंपरा, संस्कृति, संत संप्रदाय, संत साहित्य, कीर्तन, प्रवचन, दर्शनशास्त्र से संबंधित प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, डिग्री, पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स जल्द शुरू होगा। इस संतपीठ के विभिन्न शैक्षणिक प्रबंधन की जिम्मेदारी औरंगाबाद के डॉ. बाबासाहब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निर्देश के बाद राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। इसके अनुसार संतपीठ में विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रबंधन की जिम्मेदारी औरंगाबाद विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। औरंगाबाद विश्वविद्यालय को अगले पांच साल की अवधि अथवा अगला आदेश जारी होने तक यह जिम्मेदारी कुछ शर्तों के साथ दी गई है। संतपीठ की जमीन व इमारत का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही होगा। सरकार ने संतपीठ की इमारत को केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए औरंगाबाद विश्वविद्यालय को सौंपने का फैसला किया है। इससे अब संतपीठ में अध्ययन कार्य शुरू करने के काम को गति मिल सकेगी। 

संतपीठ में होगी पाठ्यक्रमों की शिक्षा 

संतपीठ के विभिन्न प्रमाणपत्रों, डिप्लोमा, डिग्री, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक प्राधिकरण से स्वीकृति लेनी पड़ेगी। विभिन्न संप्रदायों के अध्ययन के लिए अलग-अलग अध्ययन इकाइयों का चयन कर पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक संप्रदाय के कोर्स को संतपीठ के पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिया जाएगा। संतपीठ में पढ़ाने के लिए डॉ. बाबासाहब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय आवश्यकता के मुताबिक मानधन अथवा घंटों के आधार पर विशेषज्ञ व्यक्तियों की नियुक्ति बाहरी स्रोतों के जरिए कर सकेगा। जबकि शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की अनुबंध पर नियुक्त की जा सकेगी। 

एक नजर में संतपीठ 

मराठवाड़ा विकास के 42 सूत्री कार्यक्रम के तहत औरंगाबाद के पैठण में संतपीठ स्थापित करने की स्वीकृति दी गई थी। संतपीठ का मुंबई पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत पंजीकृत हुआ है। संतपीठ के लिए पैठण में ज्ञानेश्वर उद्यान के करीब 17.8 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है। संतपीठ के लिए प्रशासनिक इमारत, छात्रावास और पुस्तकालय भवन के निर्माण के लिए 6 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके जरिए संतपीठ की प्रशासनिक इमारत और दो छात्रावास का निर्माण काम पूरा हो गया है। संतपीठ की जिम्मेदारी शुरुआत में राज्य सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के पास था। लेकिन बाद में इसको राज्य के उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के पास स्थानांतरित कर दिया गया था। 

भूस्खलन और चट्टान खिसकने के क्षेत्र निश्चित करने अध्यनन समिति गठित 

वहीं प्रदेश में अतिवृष्टि के कारण होने वाले भूस्खलन और चट्टान खिसकने के संबंध में अध्ययन करके संभावित क्षेत्र निश्चित करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर रवि सिन्हा की अध्यक्षता में यह समिति बनाई गई है। बुधवार को राज्य के आपदा प्रबंधन, मदद व पुनर्वसन विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। इसके मुताबिक राज्य में भूस्खलन और चट्टान खिसकने की आपदा के संबंध में प्रतिबंधात्मक उपाय के रूप में संभावित क्षेत्र निश्चित करने के लिए 12 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति के सदस्य के रूप में भूजल सर्वेक्षण और विकास संस्था के निदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के प्रतिनिधि, पुणे विश्वविद्याय के पूर्व भूविज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. सतीश ठिगले, पुणे विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. भावना उंबरीकर, प्रभाकर देशमुख, पुणे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रतिनिधि सहित अन्य सदस्यों का समावेश है। 
 


 

खबरें और भी हैं...