Nagpur News: मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उपराजधानी में खास सेमिनार हुआ आयोजित

मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उपराजधानी में खास सेमिनार हुआ आयोजित
  • मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की पहल
  • मनोचिकित्सा में नवाचार, चुनौतियां और एआई एकीकरण पर चर्चा

Nagpur News. कॉमनवेल्थ एसोसिएशन फॉर हेल्थ एंड डिसेबिलिटी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और शांति फाउंडेशन ने संयुक्त बैनर तले मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने खास सेमिनार आयोजित हुआ। जिसमें आईएमए कॉम्प्लेक्स के डॉ मुकुंद पैठणकर हॉल में "मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना: मनोचिकित्सा में नवाचार, चुनौतियां और एआई एकीकरण" विषय पर सेमिनार आयोजित किया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नागपुर के कार्यकारी निदेशक और सीईओ डॉ पी.पी. जोशी मुख्य अतिथि थे। सूत्रधार डॉ चिन्मय आकरे ने कहा, "हमें सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति पर गर्व है। खास तौर से अतिथि डॉ उदय बोधनकर, कार्यकारी निदेशक, कॉमहैड इंटरनेशनल, डॉ सुनील खापर्डे, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कार्यकारी निदेशक, शांति फाउंडेशन और उपाध्यक्ष राजेश वासनिक, शांति फाउंडेशन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने सेमिनार को चिह्नित करने के लिए पारंपरिक दीप प्रज्वलित किया।

डॉ. सुनील खापर्डे ने अपने उद्घाटन स्वागत भाषण में कहा, “यह सेमिनार अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और अधिक प्रभावी और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का मार्ग प्रशस्त करना है।”

डॉ. उदय बोधनकर, कार्यकारी निदेशक, कॉमहैड ने कहा, “ग्रामीण आबादी की तुलना में शहरों में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की कम उपस्थिति के कारण परामर्श के लिए उपलब्धता में व्यापक अंतर है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल एक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जिसमें अत्याधुनिक उपचार दृष्टिकोण और प्रौद्योगिकी मनोरोग अभ्यास को नया रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मानसिक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाना: मनोचिकित्सा में नवाचार, चुनौतियाँ और एआई एकीकरण एक विशेष सेमिनार है, जिसे मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, चिकित्सा पेशेवरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए क्षेत्र में नवीनतम प्रगति और चुनौतियों पर उच्च-स्तरीय चर्चाओं में शामिल होने के लिए डिज़ाइन किया गया है।”

अपने संबोधन में डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि पिछले 4 दशकों में मनोरोग विज्ञान ने बहुत तरक्की की, लेकिन लोगों के दिमाग से मनोरोग पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। मेडिकल छात्रों में तनाव और चिंता, नींद न आना सबसे आम है, इसके मद्देनजर पढ़ाई के दबाव से निपटने के लिए माहौल बनाते हैं।

चिकित्सा में नई चीजें व्यक्तिगत चिकित्सा, जीनोम-व्यापी अध्ययन, फार्माको थेरेपी हैं जो व्यक्ति-केंद्रित हैं। अब उभरती हुई इको साइकियाट्री। जो तनाव और प्राकृतिक आपदाओं की चिंता से निपटती है।

डॉ. संजय रामटेके, एक प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने "वयस्कों में संज्ञानात्मक शिथिलता के निवारक पहलू, निवारक उपाय, प्रारंभिक चेतावनी संकेत और वयस्कों में संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जीवनशैली हस्तक्षेप" की खोज की। उन्होंने कहा कि न्यूरोलॉजी एक अलग शाखा है, लेकिन बीपी, मधुमेह, पोषण संबंधी कमियों आदि जैसी चिकित्सा स्थितियों के कारण व्यवहार में परिवर्तन देखा जा सकता है। सलाह देते हुए कहा कि फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, नट्स, मछली और जैतून के तेल से भरपूर भूमध्यसागरीय या DASH आहार का पालन करें, प्रोसेस्ड फूड, चीनी और रेड मीट को सीमित करें विटामिन बी12, अंडे, पत्तेदार सब्जियों और फलियों में पाया जाने वाला फोलेट मस्तिष्क रोग को रोकता है।


Created On :   20 March 2025 8:56 PM IST

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