Nagpur News: भीषण गर्मी के बीच परीक्षा, अभिभावकों की बढ़ी चिंता

भीषण गर्मी के बीच परीक्षा, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
  • जल्दी मूल्यांकन का भी रहेगा दबाव
  • प्रशासन ने परीक्षा के समय में बदलाव किया
  • अप्रैल के अंत तक बढ़ा दिया

Nagpur News महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष कक्षा 1 से 9 तक की परीक्षा के समय का ऐलान कर दिया है। इस निर्णय के अनुसार, बच्चों की परीक्षाएं 25 अप्रैल तक ली जाएगी। जहां पहले अप्रैल की शुरुआत में ही अधिकांश परीक्षाएं समाप्त हो जाती थीं, वहीं इस वर्ष प्रशासन ने परीक्षा के समय में बदलाव किया है और इसे अप्रैल के अंत तक बढ़ा दिया है। यह बदलाव बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि अप्रैल के अंत तक देश के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी पड़ने लगती है। परीक्षाओं के दौरान गर्मी की बढ़ती स्थिति, बच्चों की सेहत और परीक्षा के माहौल पर गंभीर असर डाल सकती है। विशेष रूप से, ऐसे समय में जब तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, अभिभावक और शिक्षक दोनों ही चिंतित हैं।

बच्चों की सेहत पर गर्मी का असर : इस वर्ष फरवरी से ही सूरज ने आग उगलनी शुरू कर दी है, जिससे गर्मी का असर पहले ही महसूस होने लगा है। अप्रैल के अंत तक परीक्षा होने से अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ बच्चों की परीक्षाएं सुबह के समय ली जाएंगी, जबकि कुछ स्कूलों में परीक्षाएं दोपहर के समय निर्धारित की गई हैं। दोपहर की परीक्षा, विशेष रूप से गर्मी में, बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है, क्योंकि दिन के समय तापमान अपनी चरम सीमा पर होता है। इस समय की तेज धूप और अत्यधिक गर्मी बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित कर सकती है।

सरकारी स्कूलों में ठंडे पानी और पंखे की कमी : अन्य स्कूलों में वेंटिलेशन, पंखे और ठंडे पानी की व्यवस्था तो होती है, लेकिन कई सरकारी स्कूलों में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं। बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखा जाता है। इस कारण, बच्चों को परीक्षा के दौरान लू लगने या उनके शरीर का तापमान बढ़ने का खतरा हो सकता है।

अभिभावकों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति : परीक्षा के समय में बदलाव के कारण अभिभावकों के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कुछ परिवार गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रा की योजना बनाते हैं। अब उन्हें ट्रेनों और फ्लाइट्स की बुकिंग को रद्द करना पड़ रहा है। परिवार में विवाह जैसे कार्यक्रमों की तारीखें भी देर से तय की जा रही हैं।

शिक्षकों पर भी दबाव : परीक्षाओं के समय का बदलाव सिर्फ बच्चों और अभिभावकों के लिए ही चुनौतीपूर्ण नहीं है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी यह एक बड़ा दबाव बन गया है। जैसे ही परीक्षा समाप्त होती है, शिक्षकों को परिणामों की घोषणा के लिए विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना होता है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।

Created On :   1 April 2025 3:52 PM IST

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