Nagpur News: गले में छेद कर वेंटिलेटर से दी सांस, तब बच पायी महिला की जान

गले में छेद कर वेंटिलेटर से दी सांस, तब बच पायी महिला की जान
  • निमोनिया से फेफड़ों में हुआ संक्रमण
  • गंभीर हालत देख नाउम्मीद थे परिजन

Nagpur News मेडिकल में ढाई महीने तक भर्ती रही एक महिला को डबल निमोनिया हुआ था। उसके दोनों फेफड़ों में संक्रमण फैल चुका था। उसे सांस लेना मुश्किल हो रहा था, इसलिए महिला का बचना मुश्किल हो गया था। मेडिकल के डॉक्टराें की टीम ने उसके गले में छेद कर एक नली डालकर वेंटिलेटर से कृत्रिम सांसें दी, ताकि उपचार के दौरान उसकी सांसे चलती रहें और डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर इस महिला का उपचार कर उसे नया जीवन दिया।

वात के कारण हुआ संक्रमण : शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल (मेडिकल) में ढाई माह पहले एक 42 साल की महिला उपचार के लिए आयी थी। वाठोडा निवासी महिला का नाम मनीषा फुलंाबरकर है। 30 दिसंबर 2024 को उसे गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया। प्रारंभिक जांच में पताचला कि, महिला को सांस लेने में परेशानी हो रही है, जिससे उसकी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। मेडिकल में गहन जांच के दौरान महिला के दोनों फेफड़ों में निमोनिया का संक्रमण अधिक होने का के बारे में पता चला। महिला की की गंभीर अवस्था को देखते हुए उसका बच पाना मुश्किल लग रहा था।

कृत्रिम सांस भी नहीं ले पा रही थी : डॉक्टरों की टीम ने रिपोर्ट के आधार पर महिला का तत्काल उपचार करने का निर्णय लिया। महिला को तुरंत वेंटिलेटर लगाया गया, लेकिन फेफड़ों में संक्रमण होने से पूरी तरह कृत्रिम सांस शुरू रख पाना आसान नहीं था, क्योंकि महिला कृत्रिम सांस भी नहीं ले पा रही थी। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने उपचार का नया तरीका सोचा। डॉक्टरों ने महिला के गले के पास एक छेद किया गया और वहां से एक नली वेंटिलेटर से जोड़ी, इससे महिला की सांसें चलती रहीं। दो महीने तक महिला को वेंटिलेटर पर रखकर उपचार किया गया। उसके फेफड़ों में फैला संक्रमण धीरे-धीरे कम होने लगा। जांच व दवा की सुविधा मेडिकल की तरफ से नि:शुल्क उपलब्ध करायी गई। महिला को पहले से वात रोग था। ऐसे मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और उन्हें निमोनिया घेर लेता है, जिससे उनकी जान खतरे में आ जाती है।

पैसे खत्म होने पर लाया मेडिकल | मेडिकल में आने से पहले महिला का एक निजी अस्पताल में हफ्तेभर उपचार चला। पैसे खत्म होने के बाद उसे मेडिकल ले जाने की सलाह दी गई। तीन दिन पहले ही मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने से छुट्टी दी गई। मेडिकल के डॉ. अतुल राजकोंडावार, डॉ. अर्चना अहेर, डॉ. जे. भगत, डॉ. शरद खंडारे, डॉ. पायल तायडे, डॉ. सारांश बारई, एमआईसीयू के डॉ. विनय मेश्राम आदि ने महिला की निगरानी व उपचार किया। मेडिकल के अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे आदि ने महिला के उपचारार्थ सभी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। समय-समय पर महिला मरीज की जानकारी लेकर मार्गदर्शन किया गया।

हां, महिला को जिस समय लाया गया, उस समय हालत काफी गंभीर थी। परिजनों ने उम्मीद छोड़ दी थी। उसे वात होने के कारण डबल निमोनिया हुआ था। फेफड़ों में संक्रमण फैल चुका था। बड़ी मुश्किल से सांस ले पा रही थी, इसलिए गले में छेद कर वेंटिलेटर से सांस देनी पड़ी, तब जाकर उपचार किया गया। हफ्तेभर निजी अस्पताल में उपचार के बाद पैसे खत्म होने पर उसे मेडिकल लाया गया था। हमारे डॉक्टरों की टीम ने महिला की जांच, उपचार व निगरानी की। धीरे-धीरे महिला स्वस्थ हुई। ढाई महीने बाद साेमवार को उसे छुट्टी दे दी गई -डॉ. अतुल राजकोंडावार, मेडिसिन विभाग प्रमुख


Created On :   21 March 2025 1:36 PM IST

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