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Mumbai News: पवार बोले - नीलम गोर्हे का बयान मूर्खतापूर्ण, साहित्य सम्मेलन में बोलने की भी एक मर्यादा होती है- फडणवीस
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- नीलम गोर्हे मर्सिडीज बयान पर बवाल
- साहित्य सम्मेलन में बोलने की एक मर्यादा होती है
- अपने मंच पर राजनेताओं को नहीं चाहते साहित्यकार- फडणवीस
- पुणे की महिला कार्यकर्ताओं की मातोश्री पर बैठक
Mumbai News. शिवसेना (शिंदे) नेता एवं महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे के "रिश्वत में मर्सिडीज' वाले बयान पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। गोर्हे के बयान पर उद्धव गुट आक्रामक हो गया है। पार्टी ने उन्हें घेरने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
उधर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार ने मराठी साहित्य सम्मेलन में गोर्हे द्वारा इस तरह का राजनीतिक बयान देने की आलोचना की है। पवार ने कहा कि इस तरह का बयान मूर्खतापूर्ण है। गोर्हे को इस कार्यक्रम में राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए था। जबकि मुख्यमत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि साहित्य सम्मेलन मे बोलने की एक सीमा होती है। वहां उन्हें इस तरह की बात करने की जरुरत नहीं थी।
राकांपा (शरद) अध्यक्ष शरद पवार ने नीलम गोर्हे द्वारा उद्धव गुट पर लगाए गए आरोपों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस साहित्य सम्मेलन को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन मेरा मानना है कि नीलम को इस तरह की टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं थी। यह पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण बयान है। यह सम्मेलन अच्छी तरह से चल रहा है। उन्होंने कहा कि गोर्हे को ऐसी राजनीतिक टिप्पणी करने के लिए वहां जाने की आवश्यकता नहीं थी
पवार ने कहा कि गोर्हे को चार बार विधायक पद मिला, उन्हें यह पद कैसे मिला महाराष्ट्र की जनता को पता है। गोर्हे चार पार्टियां बदल चुकी हैं और अब शिंदे गुट में हैं। इसलिए अपने अनुभव को देखते हुए उन्हें इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। संजय राऊत द्वारा उन पर सवाल उठाने के सवाल पर पवार ने कहा कि मैं साहित्य सम्मेलन का स्वागत अध्यक्ष था, अगर राऊत मुझ पर यह जिम्मेदारी डालते हैं कि शिंदे को सम्मानित क्यों किया गया तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। पवार ने कहा कि मुझे किसको पुरस्कार देने की जरूरत है, ऐसी मुझे किसी से इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है।
अपने मंच पर राजनेताओं को नहीं चाहते साहित्यकारः फडणवीस
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि साहित्यकार और आयोजकों को लगता है कि उनके मंच पर इस तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा पार्टी लाइन पर बयानबाजी करने का भी यह कोई मौका नहीं होता है। सभी चीजें मर्यादा के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्यकार हमेशा चाहते हैं कि उनके कार्यक्रम में राजनेता न आएं और वह इसको लेकर बयान भी देते रहते हैं। फडणवीस ने कहा कि नीलम गोर्हे और उनकी पार्टी में क्या चल रहा है, मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता लेकिन सभी को महाराष्ट्र की मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
पुणे की महिला कार्यकर्ताओं की मातोश्री पर बैठक
गोर्हे द्वारा आरोप लगाने के बाद शिवसेना (उद्धव) ने मामले की गंभीरता को लेते हुए सोमवार को पुणे की महिला पदाधिकारियों की मातोश्री पर बैठक बुलाई, जिसमें उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे ने गोर्हे के खिलाफ प्रदर्शन करने और इस मामले को जोर शोर से उठाने के आदेश दिए। सूत्रों का कहना है कि रश्मि ने बैठक में महिला पदाधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि गोर्हे के खिलाफ पुणे समेत पूरे राज्य में तब तक प्रदर्शन किया जाए तब तक वह माफी न मांग लें।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए कितने पैसे लिएः राऊत
शिवसेना (उद्धव) सांसद एवं प्रवक्ता संजय राऊत ने गोर्हे के बयान पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी ने चार बार गोर्हे को विधानमंडल में पहुंचाया, क्या वह इस तरह का बयान दे सकती हैं। राऊत ने गोर्हे से सवाल पूछते हुए कहा कि वह विधान परिषद की उपसभापति हैं, इसलिए उन्हें बताना चाहिए कि सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाने के दौरान उन्होंने किन-किन से कितने पैसे लिए। राऊत ने गोर्हे को नमक हराम बताते हुए कहा कि वे एक निर्लज्ज महिला हैं। साहित्य सम्मेलन के आयोजकों पर भी उगाही के आरोप लगाए। पवार पर फिर निशाना साधते हुए राऊत ने कहा कि पवार इस सम्मेलन के स्वागत अध्यक्ष थे इसलिए वह भी इसके जिम्मेदार हैं।
गोर्हे के समर्थन में रामदास कदम
शिवसेना (शिंदे) नेता रामदास कदम नीलम गोर्हे के समर्थन में आ गए हैं। कदम ने कहा कि गोर्हे राऊत से बड़ी नेता हैं, इसलिए गोर्हे को उनसे सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने मातोश्री पर कितने मिठाई के डिब्बे पहुंचाए हैं, क्या यह संजय राऊत को पता नहीं है। उन्हें इसकी जांच पड़ताल करनी चाहिए।
क्या है मर्सिडीज मामला?
दरअसल विधान परिषद की उपसभापति व शिवसेना (शिंदे) की नेता नीलम गोर्हे ने रविवार को दिल्ली में चल रहे अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में कहा था कि शिवसेना (उद्धव) में एक पद पाने के लिए दो मर्सिडीज देनी पड़ती हैं। गोर्हे के बयान पर बवाल हो गया था और उद्धव गुट के नेताओं ने उन्हें निशाना बनाते हुए कहा था कि गोर्हे को उद्धव ठाकरे ने चार बार विधायक बनाया था, तो फिर इस हिसाब से तो उन्होंने 8 मर्सिडीज गाड़ियां भेजी होंगी।
Created On :   24 Feb 2025 10:25 PM IST