- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- मुंबई
- /
- सुजाता बजाज की पेंटिंग्स में समाई...
Mumbai News: सुजाता बजाज की पेंटिंग्स में समाई है संपूर्ण गैलेक्सी, नासा की तस्वीर पर चित्रकारी

- वर्धा में बीता है पेरिस में रहने वाली सुजाता की बचपन
- सुजाता बजाज की पेंटिंग्स में समाई है संपूर्ण गैलेक्सी
Mumbai News. अगर आपको प्रकृति का दीदार करना पसंद है, ख़ासकर गहरा नीला आसमान, तारामंडल और आसमान में टिमटिमाते तारों को देखना, तो आप सुप्रसिद्ध चित्रकार सुजाता बजाज की पेंटिंग्स में इन तमाम चीज़ों को देख सकते हैं। उनकी पेंटिंग्स में संपूर्ण प्रकृति जैसे समाहित हो गई है। उनकी पिछले पांच साल के दौरान सृजित कृतियां सुरों और रंगों का ऐसा अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं, जिसे देखकर आप सम्मोहित हुए बिना नहीं रह सकते। खास बात है कि सुजाता बजाज की पेंटिंग प्रदर्शनी फोर्ट के जहांगीर आर्ट गैलरी में 4 मार्च से शुरू हुई है। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए दुनियाभर से कई प्रसिद्ध कलाकार और कला प्रेमी यहां आ रहे हैं। उनकी पेंटिंग्स ने न सिर्फ भारतीय दर्शकों को आकर्षित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सुजाता की पेंटिंग्स में अब्स्ट्रैक्ट आर्ट का बेहतरीन उपयोग दिखता है। इसमें भारतीय परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। रंगों का साहसिक और गतिशील प्रयोग उनकी शैली की प्रमुख विशेषता है। उनके चित्रों में विभिन्न भावनाएं और प्रतीकात्मकता देखने को मिलती है। सुजाता का नाम केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है। उनकी कला पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क, और दुबई जैसी वैश्विक कला दीर्घाओं में प्रदर्शित हो चुकी है। उनकी शैली में पिकासो, मातिस और भारतीय पारंपरिक तत्वों का अनोखा समन्वय देखने को मिलता है।
ऐसे हुआ "स्पेसस्केप्स' का बीजारोपण
2019 में, सुजाता ने नासा के हबल टेलीस्कोप से ली गई एंड्रोमेडा गैलेक्सी की छवि देखी। इस तस्वीर से वह तुरंत जुड़ गईं, बिना यह जाने कि यह वास्तव में क्या थी। यहीं से "स्पेसस्केप्स' का बीजारोपण हुआ। इस यात्रा के लिए नई तकनीकों और प्रयोगों की आवश्यकता थी। सो, उन्होंने जेम्स वेब टेलीस्कोप से लिए गए चित्रों का भी अध्ययन किया और खुद को इसके सृजन में समर्पित कर दिया। यह पेंटिंग्स उनकी खोज और प्रयोगों का परिणाम हैं। सुजाता की कला समय और स्थान के बीच अनूठा रिश्ता बनाती है। ऐसा प्रतीत होता है कि समय उनके चित्रों से फिसलकर कहीं और बह चला है। यह वही अहसास है जो यात्री को ट्रेन में सफर करते हुए महसूस होता है। हर कोई अपनी राह पर चलता जा रहा है, लेकिन किसी को एहसास नहीं कि वह किस ओर बढ़ रहा है। जब हम आकाश की ओर देखते हैं और सितारों को नहीं देख पाते, तो यह प्रश्न उठता है कि हम कहां हैं, कहां जा रहे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, हम कहां से आए हैं? यह वही सवाल है जो वैज्ञानिक और कलाकार दोनों अपने-अपने तरीकों से पूछते हैं। क्या उत्तर गणित और भौतिकी में छिपा है, या फिर रंगों और आकृतियों में?
वर्धा में बीता है पेरिस में रहने वाली सुजाता की बचपन
खगोलशास्त्री ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को समझने के लिए ग्रहों का अध्ययन करता है, पर कलाकार उन्हीं रहस्यों को रंगों और कैनवास पर उकेरता है। सुजाता के चित्रों में दिखने वाले लाल, नीले और हरे रंग केवल रासायनिक तत्वों की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे जीवन, ऊर्जा और ब्रह्मांड की कहानी भी कहते हैं। पेरिस में रहने वाली सुजाता बजाज प्रख्यात गांधीवादी राधाकृष्ण बजाज की प्रपौत्री हैं और उनका बचपन वर्धा में बीता है।
Created On :   9 March 2025 9:25 PM IST