Jabalpur News: जीरो से 150 डिग्री टेम्प्रेचर तक में फाॅल्ट पकड़ लेता है ड्रोन कैमरा

जीरो से 150 डिग्री टेम्प्रेचर तक में फाॅल्ट पकड़ लेता है ड्रोन कैमरा
  • ट्रांसमिशन टॉवरों की ड्रोन पेट्रोलिंग में एआई की एंट्री
  • 70 फीसदी फाॅल्ट में कमी, लोगों को बिजली आपूर्ति बाधित होने से मिलेगी निजात
  • दुर्गम इलाकों में अब टॉवरों की सटीक हाईटेक मॉनिटरिंग की जा रही है।

Jabalpur News: की ट्रांसमिशन लाइनों के टॉवरों की ड्रोन से की जाने वाली पेट्रोलिंग में अब एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की एंट्री हो चुकी है। इस अपग्रेडेशन से टॉवरों पर सटीक तौर पर नजर रखना आसान हो रहा है, साथ ही उन इलाकों पर भी सीधी पहुंच संभव हो सकी है जहां ढेरों मुश्किलें हैं। जहां बिजली कंपनी को फाॅल्ट खोजने और उसे रिपेयर करने में मदद मिल रही है, तो वहीं जनता को बिजली आपूर्ति के बाधित होने की समस्या से निजात मिल रही है।

दुर्गम इलाकों में अब टॉवरों की सटीक हाईटेक मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके जरिए बिजली कंपनी ने करीब 70 फीसदी तक इमरजेंसी फाॅल्ट आने के पहले ही उसमें सुधार कर लिया। इसके कारण पिछले एक साल में ब्रेक डाउन में अप्रत्याशित कमी आई है, साथ ही मैन पाॅवर की कमी की समस्या से भी निजात मिली है। ड्रोन के जरिए अभी फिलहाल 400, 220 एवं 123 केवी अति उच्चदाब लाइन टाॅवरों की ड्रोन के जरिए पेट्रोलिंग की जा रही है।

समय की बचत और टूट-फूट की मरम्मत होगी

अति उच्चदाब लाइनों के टाॅवरों की निगरानी ड्रोन से करने का प्रयोग सफल होने के बाद अब प्रदेश में हाई टेंशन लाइनों के टाॅवरों की ड्रोन से सटीक पेट्रोलिंग की जा रही है। इसके जरिए जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर चंबल संभाग के साथ अन्य जिलों की हाई टेंशन लाइनों के 23000 टाॅवरों की ड्रोन से निगरानी शुरू हो गई है। ड्रोन से देखरेख के साथ फाॅल्ट और बिजली की लाइन और टाॅवरों में टूट-फूट की सटीक जानकारी भी कंपनी को हो सकेगी। इससे समय की बचत होगी और जल्दी फाॅल्ट या लाइन सुधारी जा सकेगी।

फोटो के थर्मल सेंसर से टेम्प्रेचर की जानकारी

ड्रोन द्वारा टॉवरों की ली जाने वाली फोटो में थर्मल सेंसर होता है, जिससे टेम्प्रेचर का पता लगाना संभव होता है और इससे फॉल्ट ढूंढने में आसानी होती है। फोटो लेने के लिए एचडी कैमरे का उपयोग किया जाता है। ट्रांसमिशन टाॅवरों की जियो टैगिंग है। गूगल मैप से लोकेशन आईडेंटिफाई हो, इसके अलावा हर टाॅवर की लोकेशन लोंगिट्यूड लट्टीट्यूड निश्चित है।

एक जगह से चार किमी तक कंट्रोल

ड्रोन पेट्रोलिंग से एक स्थान पर बैठकर लगभग चार से पांच किलोमीटर दूर तक के टाॅवरों की पेट्रोलिंग की जा सकती है। ड्रोन द्वारा दी गई तस्वीरों को क्लाउड कम्प्यूटिंग से एनालाइज किया जाता है। ड्रोन तीन से चार मीटर तक की दूरी से फोटो लेने में सक्षम है। फॉल्ट कितनी दूरी पर आया है इसका पता सब-स्टेशन पर लगे उपकरणों से लगाया जाता है।

अभी 42 हजार टॉवर हैं जद में

मध्य प्रदेश में 23 हजार किलोमीटर सर्किट से अधिक की लाइनें हैं और 80 हजार के लगभग ट्रांसमिशन टाॅवर हैं। वर्तमान में करीब 42 हजार टाॅवरों की ड्रोन से पेट्रोलिंग की जा रही है। ड्रोन पेट्रोलिंग की शुरुआत में कुछ चुनिंदा टॉवरों को शामिल किया गया था, जब इन टॉवरों में यह एक्सपेरिमेंट सफल हुआ, तब इसे आगे बढ़ाया गया है। दावा किया गया है कि अगले कुछ ही सालों में प्रदेश में सभी टॉवरों को ड्रोन पेट्रोलिंग से जोड़ा जाएगा।

मप्र पाॅवर ट्रांसमिशन कंपनी हाई टेंशन टाॅवरों की ड्रोन से पेट्रोलिंग करने से जहां दुर्गम स्थानों के टाॅवरों की टाॅप पेट्रोलिंग सहजता से संभव हो सकेगी। वहीं ट्रांसमिशन टाॅवरों में आने वाले संभावित फाॅल्ट का समय रहते पता लगने से अनावश्यक व्यवधान से बचा जा सकेगा।

- इंजी सुनील तिवारी, प्रबंध संचालक, एमपी ट्रांसको

Created On :   3 April 2025 2:19 PM IST

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