danik bhaskar
Monday, 23 January, 2017
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नई दिल्ली : विजय माल्या जैसे उद्योगपतियों द्वारा बैंकों की ऋण अदायगी न करके कथित रूप से अरबों रुपयों की धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अब सरकारी बैंकों को एक करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामलों की सूचना केंद्रीय सतर्कता आयोग को देनी अनिवार्य होगी। सीवीसी बैंकों की 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों की नियमित निगरानी भी करेगा। इसके लिए सीवीसी रिजर्व बैंक और केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों के साथ नियमित बैठक करने जा रहा है।

सतर्कता आयुक्त टीएम भसीन ने सोमवार को सतर्कता सप्ताह की शुरुआत के मौके पर नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि बैंकों की रिपोर्टों के आधार पर सीवीसी धोखाधड़ी के मामलों की सीबीआई से जांच की सिफारिश करेगा। सीवीसी ने इसके लिए बैंकों के महाप्रबंधक स्तर के चार अधिकारियों की सेवाएं ली हैं। बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे एक करोड़ रुपये से अधिक संदिग्ध मामलों से जुड़ी धोखाधड़ी निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली की सूचनाएं सीवीसी से भी साझा करें। अभी तक ये सूचनाएं सिर्फ रिजर्व बैंक से ही साझा की जाती थीं।
 

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