danik bhaskar
Monday, 23 January, 2017
Updated
State » maharstra

शीना बोरा मर्डर मिस्‍ट्री : इंद्राणी की न्यायिक हिरासत 31 अक्तूबर तक बढ़ायी गयी

By bhaskarhindi.com | Publish Date: Oct 19 2015 7:26PM | Updated Date: Oct 19 2015 7:26PM

मुंबई: शीना बोरा हत्याकांड में इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और चालक श्याम राय की न्यायिक हिरासत आज एक स्थानीय मजिस्ट्रेट ने 31 अक्तूबर तक के लिए बढा दी.मजिस्ट्रेट एनबी शिन्दे ने तीनों की हिरासत 12 दिन के लिए बढा दी. तीनों आरोपियों की हिरासत की अवधि आज खत्म हो गई थी. अदालत में किसी भी आरोपी को पेश नहीं किया गया.

बचाव पक्ष के वकील श्रेयांश मिठारे ने कहा, ‘‘अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 31 अक्तूबर तक के लिए बढा दी है.' मिठारे ने यह भी बताया कि राय ने अदालत को एक पत्र लिखा है जिसमें उसने कहा है कि वह अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रुप से कुछ खुलासा करना चाहता है. अदालत आज बाद में उसका पेशी वारंट जारी कर सकती है.

उनकी गिरफ्तारी और लंबी जांच के एक पखवाडे बाद सात सितंबर को अदालत ने इंद्राणी और उनके चालक राय को 21 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था जिसे बाद में पांच अक्तूबर तक के लिए बढ़ा दिया गया.एक दिन बाद आठ सितंबर को खन्ना को भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

इंद्राणी, खन्ना और राय को शीना की हत्या करने और शव को रायगढ के जंगल में ठिकाने लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.पुलिस ने रायगढ के जंगलों से शव के अवशेष बरामद किए थे और बाद में दावा किया था कि शीना के प्रोफाइल का डिजिटल सुपरइंपोजीशन जंगल से बरामद खोपडी से मेल खा गया.

पुलिस ने इंद्राणी के पति पीटर मुखर्जी से भी गहन पूछताछ की थी. हालांकि, वह मामले में आरोपी नहीं हैं. अन्य जिन लोगों से पूछताछ की गई, उनमें पीटर के बेटे राहुल मुखर्जी और इंद्राणी तथा संजीव खन्ना की बेटी विधि भी शामिल है.इनके अलावा शीना के जैविक पिता सिद्धार्थ दास और भाई मिखाइल बोरा से भी पुलिस ने पूछताछ की थी.

शीना (24) की अप्रैल 2012 में एक कार में गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी और फिर उसके शव को मुंबई से करीब 84 किलोमीटर दूर रायगढ के जंगल में ठिकाने लगा दिया गया था.पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार ने शीना हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया था. सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को उनकी कथित अति सक्रियता के चलते जांच के बीच में ही हटा दिया था.

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) केपी बख्शी ने 18 सितंबर को एक संवाददाता सम्मेलन में ‘‘पूर्वाग्रह' मुक्त जांच की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि सीबीआई को मामला सौंपे जाने में मामले के वित्तीय पहलू का भी ध्यान रखा गया है.

danik bhaskar