danik bhaskar
Monday, 20 February, 2017
Updated

मुंबई.

विवादों में घिरी स्वघोषित धर्मगुरु राधे मां के खिलाफ बॉम्बे पुलिस एक्ट के प्रावधानों के तहत क्या असभ्यता व अश्लीलता का मामला बनता है? गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल किया। पेशे से वकील फाल्गुनी ब्रम्हभट्‌ट की ओर से दायर याचिका में राधे मां पर असभ्यता, अश्लीलता, धोखाधड़ी व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही दावा किया है कि पुलिस उसकी शिकायत पर कुछ नहीं कर रही है।
न्यायमूर्ति वीएम कानडे व न्यायमूर्ति एस.फनसालकर जोशी की खंडपीठ ने इस दौरान याचिका पर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए। खंडपीठ ने कहा कि राधे मां पर लगाए गए आरोप अश्लील नजर नहीं आते हैं। इस दौरान राधे मां की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल के जो कार्यक्रम हुए हैं वे घर के भीतर हुए हैं।

ऐसे में मेरे मुवक्किल पर कैसे अश्लीलता बरतने का आरोप लगाया जा सकता है?

इस पर खंडपीठ ने कहा कि राधे मां ने जो कुछ किया है वह घर की चहार दिवारी के भीतर किया है?
इस लिहाज से क्या ऱाधे मां के कृत्य को बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 110 के तहत सार्वजनिक रुप से अश्लील कहा जा सकता है?
 

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