danik bhaskar
Tuesday, 28 March, 2017
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औरंगाबाद, मुंबई.
मराठवाड़ा में सूखे की स्थिति का मुकाबला करने सरकार ने सभी स्तर पर तैयारी कर ली है। इसके लिए विशेष योजना बनाई गई है, जिसके अंतर्गत पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा और पानी, तथा ग्रामीण सूखा पीड़ित क्षेत्रों में लोगों को काम उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। कामों को लेकर मराठवाड़ा के 8 जिलों के जिलाधिकारियों व जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को हिदायत भी दी गई, ताकि उक्त कामों में किसी भी तरह की लापरवाही व भ्रष्टाचार न हो।
मुख्यमंत्री देवेंद्र रविवार को यह जानकारी यहां सूखे की स्थिति का जायजा लेने हुई बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा में दी। मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में संभागीय आयुक्त कार्यालय में संबंधित जिलों के सम्पर्कमंत्री, जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई थी।
 
जल आपूर्ति मंत्री बबनराव लोणीकर ने बैठक में जानकारी देते हुए कहा कि उनका स्वयं का छह माह का मानधन, जिले के सभी लोकप्रतिनिधियों को एक माह का मानधन, और जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दिन का वेतन किल्लत उपाययोजना के लिए मुख्यमंत्री निधि सौंपे जाने की जानकारी दी।

तालाबों में पानी छोड़ा जाएगा : मराठवाड़ा के तालाबों में ऊपरी छोर वाले यानी नाशिक, नगर जिले के तालाबों से पानी छोड़े जाने के बारे में सरकार ने नियोजन किया है। किंतु इस मामले में टेक्निकल समस्या के चलते उक्त तालाबों से पानी छोड़ने के बारे में जो नियम और अधिकार हैं वह जलसंपत्ति प्राधिकरण को हैं।

किसानों को अनाज वितरण : सूखा पीडि़त क्षेत्र के किसानों को तीन रुपए किलो चावल और दो रुपए किलो के हिसाब से गेहूं वितरित करने की योजना 15 अगस्त से जारी की गई है। वह आगे भी जारी रहेगी।
सूखा राहत कोष में एक दिन का वेतन : जालना जिले के सम्पर्कमंत्री तथा जिले के सरकारी कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन सूखा राहत मुख्यमंत्री निधि को देने का निर्णय लिया है।
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