danik bhaskar
Wednesday, 18 January, 2017
Updated

भोपाल : मध्यप्रदेश में कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिये पिछले वर्ष किये गये प्रयास से 3 लाख नए बच्चों को आंगनवाडी केन्द्रों से जोड़ा गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इससे उन बच्चों और गर्भधात्री महिलाओं को लाभ मिला है, जो एकीकृत बाल विकास परियोजना द्वारा संचालित सेवाओं की पहुँच से बाहर थे। इसके लिये कुपोषित बच्चों को घर ले जाने के लिये टिफिन और पायलट प्रोजेक्ट में 5 जिलों में गर्भधात्री माताओं को फुल मील की शुरूआत की गई। बच्चे आँगनवाड़ी केंद्र जायें, उसकी सेवाओं से लाभान्वित हों, इसके लिये बीते वर्ष में दो चरण में चलाए गये आँगनवाड़ी चलो अभियान से 3 लाख बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रों से जुड गए हैं। 

महिला एवं बाल विकास मंत्री माया सिंह ने बताया कि आँगनवाड़ी में जो बच्चे नहीं पहुँच पाते थे, वे अस्थायी बसाहट में रहते थे। इनके लिये इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और भोपाल में चलित आँगनवाड़ी ‘जुगनू’ शुरू किया गया है। कुपोषण के विरुद्ध शुरू किए गए सुपोषण अभियान से प्रदेश में कुपोषण में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। माया सिंह ने बताया कि कुपोषित बच्चों की निगरानी और उनके पुनर्वास के लिये "डे-केयर सेंटर-कम-फ्रेश' की स्थापना की गयी। प्रदेश के 4 जिले धार, सिंगरौली, श्योपुर और शिवपुरी की 300 आँगनवाड़ी में डे-केयर सेंटर स्थापित किये गए हैं।
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