danik bhaskar
Wednesday, 18 January, 2017
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भोपाल: मध्यप्रदेश में सुपोषण अभियान के बेहतरीन रिजल्ट आए हैं और इससे प्रदेश भर में कुपोषण को खत्म करने में काफी सहायता मिली है। अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन की गतिविधियों से विभिन्न श्रेणी में कुपोषण में भारी कमी आई है। मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री माया सिंह ने यह बात कही है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म-दिवस 25 दिसम्बर 2010 को यह मिशन शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि पिछले 5 साल में मिशन ने अपने लक्ष्य पूर्ति के लिये प्रदेश में 7 चरणों में सुपोषण अभियान चलाया। इसमें 15 हजार 357 शिविर लगाये गये। शिविरों में एक लाख 68 हजार अति कम वजन के बच्चों को लाभ मिला। इन शिविरों के जरिये की गई गतिविधियों से कुपोषण में भारी कमी दिखी। श्रीमती सिंह ने जानकारी दी कि वर्ष 2005-06 में हुए सर्वे में सामान्य से कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 60 था, जो वर्ष 2013-14 में घटकर 36.1 प्रतिशत हो गया। इस तरह 39.8 प्रतिशत की गिरावट आयी। अति कम वजन वाले बच्चों का कुपोषण 27.3 प्रतिशत था जो घटकर 12 प्रतिशत हो गया। इसमें 56 प्रतिशत की कमी दिखी है। ऊँचाई के अनुपात में कम वजन 35 प्रतिशत से घटकर 17.5 प्रतिशत, गंभीर कुपोषण 12.6 प्रतिशत से घटकर 5.4 प्रतिशत, उम्र के अनुपात में कम ऊँचाई का कुपोषण 50 से घटकर 41.6 प्रतिशत और अति कम ऊँचाई बच्चों का कुपोषण 26.3 प्रतिशत से घटकर 18.5 प्रतिशत रह गया है। मंत्री सिंह ने बताया कि अटल बाल आरोग्य मिशन में सुपोषण अभियान के अलावा पांच जिलों में गर्भवती/धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के लिये एक टाइम पूरा भोजन देने की शुरुआत पायलट तौर पर प्रदेश के सर्वाधिक कम वजन के बच्चों वाले जिले सतना, बड़वानी, अलीराजपुर, डिंडोरी एवं उमरिया में शुरू कर दिया गया है। इसमें गर्भवती/धात्री माताओं को भोजन के अतिरिक्त एक मौसमी फल, लड्डू और हलवा प्रतिदिन दिया जाता है। चलित आँगनवाड़ी इंदौर, भोपाल ग्वालियर एवं उज्जैन में शुरू की गयी हैं। कम वजन के बच्चों पर निरंतर निगरानी रखने के लिये 11,000 इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीन और 3,000 सॉल्टर वेइंग मशीन आँगनवाड़ियों को दी गई हैं।
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