danik bhaskar
Monday, 23 January, 2017
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ग्वालियर: सुविख्यात संगीत कलासाधक पद्मश्री पं. अजय चक्रवर्ती को वर्ष 2014-15 के ‘‘राष्ट्रीय तानसेन सम्मान’’ से विभूषित किया गया है। अलंकरण समारोह विधायक जयभान सिंह पवैया के मुख्य आतिथ्य में गुरूवार की शाम तानसेन समारोह स्थल पर आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि ने पं. चक्रवर्ती को तानसेन अलंकरण के रूप में 2 लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका, शॉल, श्रीफल भेंट किए। जयपुर के प्रसिद्ध मोहनवीणा वादक पं.विश्वमोहन भट्ट को बुधवार को ही वर्ष 2013-14 के तानसेन सम्मान से नवाजा गया था।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपने हृदयस्पर्शी मोहक स्वर से देश-दुनिया में गहरी प्रतिष्ठा हासिल कर चुके पं. चक्रवर्ती पटियाला घराना गायिकी के सर्वश्रेष्ठ कलाकार हैं। इस घराने की पहचान स्व. उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ के माध्यम से संगीत जगत में व्याप्त है। पं. चक्रवर्ती को संगीत के क्षेत्र में और भी राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिल चुके हैं। संस्कृति विभाग के अपर सचिव राजेश मिश्रा ने राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण से पहले पं. अजय चक्रवर्ती के सम्मान में तानसेन अलंकरण का वाचन किया। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश शासन पं. अजय चक्रवर्ती को गायन के क्षेत्र में असाधारण मेधा, गहरी कल्पनाशीलता व उत्कृष्ट सर्जनात्मक अभिप्रायों के साथ भारतीय संगीत जगत में गरिमापूर्ण उपस्थिति के लिये राष्ट्रीय तानसेन सम्मान वर्ष 2014-15 से सादर विभूषित करता है। राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से विभूषित पं. अजय चक्रवर्ती ने इस मौके पर कहा कि ग्वालियर भारत का एक शहर भर नहीं वह हमारे लिये एक पुण्य भूमि है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर हमारे लिये मंदिर है और मैं सुर सम्राट तानसेन का जन्मों का नौकर हूँ। उनका कहना था कि धन्य है यह धरा जहाँ तानसेन के रूप में इतने बड़े साहित्यकार और फनकार पैदा हुए।

पं. चक्रवर्ती ने कहा कि ख्याल गायिकी का पहला स्वरूप ग्वालियर में ही ईजाद हुआ। ग्वालियर की गायिकी को आधार मानकर ही बड़े गुलाम अली खाँ ने पटियाला गायिकी को शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में पहचान दिलाई। उन्होंने कहा शुद्ध वाणी व शुद्ध आकार ग्वालियर घराने की विशिष्टता रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कला के क्षेत्र में जितने अवार्ड देती है, उतना कोई भी राज्य नहीं देता। इसके लिये प्रदेश सरकार साधुवाद की पात्र है। उन्होंने कहा कि एक कला साधक की जिम्मेदारी होती है कि कला के सम्मान के रूप में उसे जो मिलता है, उसकी वापसी वह कला साधकों की नई पीढ़ी तैयार करे। पं. चक्रवर्ती ने कहा इसी ध्येय को ध्यान में रखकर उन्होंने श्रुति नंदन स्कूल शुरू किया है। जिसमें 1,000 से अधिक बच्चे नि:शुल्क संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। पं. चक्रवर्ती ने कहा कि मेरे लिये खुशी और सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्थापित पहला राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान भी मुझे मिला था। 

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