danik bhaskar
Monday, 23 January, 2017
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रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज सत्तापक्ष के जोरदार प्रतिकार के बीच नेता प्रतिपक्ष द्वारा ढ़ाई दशक पुराने भूख से मौत मामले में गत गुरूवार दिए अपने बयान में चूक को स्वीकारने के बाद इस मसले पर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उत्पन्न हुए विवाद को समाप्त किया गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री अजय चन्द्राकर,राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने नेता प्रतिपक्ष सिंहदेव द्वारा गत गुरूवार को दिए गए सशर्त इस्ताफे का मामला उठाया,और कहा कि श्री सिंहदेव ने जिस रिबई पन्ड़ो की मौत का जिक्र किया और उस आधार पर इस्तीफा दिया वह भ्रामक था। इस मामले का जिक्र करने वाले भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा के पास पूरे प्रमाण है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी.नरसिंहराव जिस दिन सरगुजा के रघुनाथ नगर पहुंचे थे,रिबई पन्ड़ो की मौत नही हुई थी। इस कारण उनका इस्तीफा स्वीकारना चाहिए। अध्य़क्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने सत्ता पक्ष के सदस्यों से अनुरोध किया कि वह प्रश्नकाल चलने दे,इसके बाद वह इस मामले को उठाए। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हो गया। प्रश्नकाल समाप्त होते ही मंत्री श्री पाण्डेय ने फिर इस मामले को उठाया। इस पर कांग्रेस सदस्य सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि सशर्त इस्तीफे का कोई मतलब नही है। सत्ता पक्ष अनावश्यक रूप से यह मामला उठा रहा है। मंत्री चन्द्राकर ने कहा कि अध्यक्ष को श्री सिंहदेव के इस्ताफे को संज्ञान में लेना चाहिए। कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के बयान से सदन की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहा है। किसी भी सदस्य को सदन में प्रमाणिक बात कहनी चाहिए श्री सिंहदेव को अपने शब्द वापस लेना चाहिए। भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने कहा कि सभी तथ्य वह दे रहे है,श्री सिंहदेव ने गलतबयानी कर राज्य की ढ़ाई करोड जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है। अग्रवाल ने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान कहे शब्दों पर पुतले जलाया जाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होने कहा कि सरगुजा क्षेत्र में भाजपा सदस्य श्री शर्मा के पुतले जलाए गए,अगर ऐसा होगा तो सदन में कुछ कहना मुश्किल होगा।उन्होने कहा कि सदन में नेता प्रतिपक्ष स्वय मौजूद है उन्हे भी अध्य़क्ष को अपना पक्ष रखने को कहना चाहिए। इस दौरान भाजपा सदस्य श्री शर्मा ने रामायण की पंक्तियों..रघुकुल नीति सदा चल आई,प्राण जाए पर वचन न जाई..का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री सिंहदेव राजपूत है और उन्हे अपने इस्तीफे के वचन को निभाना चाहिए। इस पर कांग्रेस सदस्य भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री भी राजपूत है उन्हे भी धान का समर्थन मूल्य 2100 रूपए क्विंटल देने तथा 300 रूपए क्विंटल बोनस देने का वचन का निभाना चाहिए।इस पर सदन में ठहाके लगे। श्री सिंहदेव ने इसके बाद कहा कि उनसे इस मामले में चूक हुई है। वह अपने कहे शब्दों में कार्यवाही में संशोधन किए जाने का लिखित अनुरोध करेंगे। उन्होने एक फिल्म के गीत से अपने भाषण को शुरू करते हुए कहा कि वह उस दिन भावनाओं को नियंत्रित नही कर सके।भाजपा सदस्यों ने उनसे अपने उस दिए कहे शब्द वापस लेने की मांग की पर उन्होने शब्द वापस नही लिया। अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने इस मसले पर अपनी व्यवस्था में श्री सिंहदेव के चूक को स्वीकारने का उल्लेख करते हुए इस मामले को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होने इस मामले में अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस सदस्य श्यामाचरण शुक्ला के 1992 में दिए गए सम्बोधन के अंशों को भी उद्दृत किया।

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