danik bhaskar
Wednesday, 29 March, 2017
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पत्थलगांव/रायपुर : छत्तीसगढ के जशपुर जिले के ग्रामीण अंचलों की बंजर भूमि और खेत खलिहान के किनारे उगने वाला जंगली चिरोंटा का बीज इन दिनों चीन, जापान और मलेशिया तक अपनी धूम मचा रहा है। इस बीज में औषधीय गुणों के बारे में पता चलने के बाद ये विदेशियों को खूब रास आने लगा है। 

गांवों में जिस चिरोंटा बीज को अनुपयोगी माना जाता था, उसका इन दिनों व्यापारियों द्वारा लगभग 40 रूपये प्रति किलोग्राम की दर पर भुगतान किया जा रहा हैं। यही कारण है कि ग्रामीणों को बगैर मेहनत के उगने वाले चिरोंटा बीज को बेच कर धान से दो गुना अधिक कीमत मिलने से ये जीवनयापन का अच्छा साधन बन गया है। 

जिले से ये बीज विदेशों में निर्यात करने वाली एक फर्म के निदेशक राहुल जैन ने बताया कि जशपुर और सरगुजा जिले का चिरोंटा बीज प्रदेश में सबसे अच्छी क्वालिटी का माना जा रहा है। चीन और जापान में चिरोंटा का पहले हर्बल टी और कॉफी के लिए उपयोग किया जाता था, लेकिन अब इसके औषधीय गुणों के चलते ये कई देशों में लोकप्रिय हो गया है। 

उन्होंने बताया कि इस बीज को मांग के अनुसार 50 और 25 किलों की पैंकिग करा कर मुंबई पोर्ट से निर्यात किया जा रहा है। बीज का परीक्षण करने पर इसमें कैफिन फ्री कॉफी और चाय के अलावा फाइबर और गम जैसे कई गुण पाए गए हैं। ग्राम पंचायत चन्दागढ़ के सरपंच रोशन प्रताप सिंह ने बताया कि बंजर भूमि पर बहुतायत में उगने वाले चिरोंटा को पहले ग्रामीण रास्ता रोकने वाला कांटा मानते थे, लेकिन अब यह कई लोगों की रोजी-रोटी का साधन बन गया है।

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