danik bhaskar
Wednesday, 29 March, 2017
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रायपुर: बुधवार को शासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. केएस शांडिल्य ने सिप्रोसिन, आईबुप्रोफेन दवा की निर्माता कंपनी मेसर्स टेक्नीकल लैब एण्ड फार्मा प्रा.लिमिटेड हरिद्वार के खिलाफ FIR दर्ज करवा दी है। पेंडारी, बिलासपुर नसबंदी कांड में दोनों ही दवाएं मानक स्तर से काफी घटिया पाई गईं थी। 13 महिलाओं की मौत के मामले में यह पहली बार है जब राज्य से बाहर की किसी कंपनी या व्यक्ति पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
 
9-10 नवंबर 2014 को नसबंदी शिविर में जिन 13 महिलाओं की जान गई उन्हें सिप्रोसिन के साथ-साथ आईबुप्रोफेन भी दी गई थी। स्वास्थ्य संचालनालय के मुताबिक, नसबंदी कांड के पहले ही आईबुप्रोफेन को जिलों से वापस करने निर्देश जारी किए गए थे, क्योंकि दवा स्तरहीन थी। कांड के बाद तो सारी दवाएं जब्त कर ली गई थी। शिविर से ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सिप्रोसिन और आईबुप्रोफेन की सैंपलिंग की गई थी। जिन्हें जांच के लिए देश की अलग-अलग लैब में भेजा गया था, ये दोनों ही दवाएं अमानक करार दी गईं। 
 
इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित अनिता झा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दोनों दवाओं को विषाक्त करार दिया था। हालांकि दवाओं में जहर की किसी भी लैब ने पुष्टि नहीं की है।
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